धर्म, कर्म और हमारा व्यवहार ही हमारे साथ जाता है-पंडित राहुल कृष्ण आचार्य
सीहोर। भगवान शिव और राम आदि के नाम जाप से हमें धर्म का लाभ प्राप्त होता है। आज सनातन धर्म के लिए जागरुकता की आवश्यकता है। धर्म, कर्म और हमारा व्यवहार ही हमारे साथ जाता है। हमारी कमाई हुई संपत्ति और धन यहीं रह जाएगा। इसलिए धर्म को धन मानो। क्योंकि जो धर्म को धन मानते हैं उन्हें राम मिलते हैं। उक्त विचार शहर के प्राचीन करोली माता मंदिर में जारी सात दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं से कथा वाचक पंडित राहुल कृष्ण आचार्य ने कहे। उन्होंने कहा कि राजा दशरथ जी की आंख और मन केवल धर्म को देखते थे तो उन्हें पुत्र के रूप में प्रभु श्री राम मिले और रावण धन को धर्म मानता था जिसे राम तो मिले लेकिन काल के रूप में।
कथा वाचक पंडित राहुल ने कहा कि राजा दशरथ को उनके पुण्य कर्मों का फल मिला और प्रभु श्री राम के रूप में भगवान नारायण ने उनके यहां जन्म लिया। रावण भी बड़ा प्रतापी था और महान शिव भक्त भी था, लेकिन वह अहंकारी था। रावण को प्रभु श्री राम तो मिले, लेकिन काल के रूप में जो जीते जी प्रभु को नहीं पहचान पाया। धर्म को धन और अच्छे आचरण के साथ जरूरतमंदों की सेवा को अपनी संपत्ति समझो, जिसे जितना हो जमा करो। ईश्वर यही देखता है बाकी उसे आपके वैभव और संपत्ति से कोई लेना-देना नहीं होता। आज से और अभी से अपने खाते को अच्छे कर्मों से भरना शुरू कर दो, तो आपका जीवन धन्य हो जाएगा। भगवान राम जब लंका पर विजय प्राप्त करके लौट रहे थे तो उन्होंने गंधमादन पर्वत पर विश्राम किया और वहां पर ऋषि मुनियों ने श्रीराम को बताया कि रावण एक ब्राह्मण था। उसका वध करने से उन पर ब्रह्महत्या का दोष लगा है, जो शिवलिंग की स्थापना करके ही दूर हो सकता है।
शिवलिंग की स्थापना के लिए भगवान राम ने हनुमानजी से शिवलिंग लाने को कहा। मगर कैलाश पर्वत पर पहुंचकर हनुमानजी को भगवान शिव नजर नहीं आए तो वह वहीं भोलेबाबा के प्रकट होने के लिए तपस्या करने लगे। इधर रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना का मुहूर्त निकला जा रहा था। भगवान शिव ने प्रकट होकर हनुमानजी को शिवलिंग प्रदान किया लेकिन तब तक माता सीता मुहूर्त निकल जाने के भय से बालू का शिवलिंग स्थापित कर चुकी थीं।








