हाट बाजार में गुड़ और तिल की खूब हुई बिक्री

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मांग बड़ने पर बढ़ते जा रहे हैं दाम

रक्तचाप और सुगर के लिए है फायदेमंद तिल

नर्मदापुरम। मकर संक्रांति के पर्व के त्यौहार को लेकर अभी से आसपास ग्रामीण क्षेत्र से किसान लोग तिल लेकर आने लगे हैं। मकर संक्रांति पर्व नजदीक आते ही हाट बाजार में तिलकुट तथा तिल और गुड़ के आयटम आने शुरू हो जाते हैं। अगले सप्ताह में मकर संक्रांति का त्यौहार आने ही वाला है। पर्व को लेकर बाजार भी सजने लगे हैं। असली कूटे हुए तिल और गुड़ और चीनी से बने तिलकुट खरीदने के लिए लोगों की चाहत बड़ने लगी है। बातार में तिल और गुड़ की मांग सबसे अधिक होने लगी है। तिल और गुड़ खाने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी है। वैद्य चंद्र नारायण ने कहा कि सर्दियों में शरीर का तापमान गिर जाता है। ऐसे में हमें बाहरी तापमान से अंदरूनी तापमान का सामन्यजस्य बनाए रखने की आवश्यकता है। तिल और गुड़ की तासीर गर्म होती हैं। इस मौसम में इन्हें खाने से शरीर गर्म रहता है। पौष्टिकता भी बडती है। इसलिए मकर संक्रांति के त्योहार में ये चीजें खाई और बनाई जाने का रिवाज वर्षों से हैं। मकर संक्रांति के पूर्व से ही मांग बढ़ने से दोनों वस्तु के दाम बड़ गए हैं। जिसमें गुड़ तो शकर से भी ज्यादा दाम पर पहुंच गया है। गुड़ 50से 60 रुपए किलो तथा तिल के दाम 200 रुपए प्रति किलो के भाव बिक रही है। हाट में कुछ किसान लेकर आए थे।

वैद्य चंद्र नारायण ने बताया कि तिल खाने के कई फायदे हैं। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में यह काफी कारगर है। रक्तचाप नियंत्रित रहने से दिल पर ज्यादा भार नहीं पड़ता है। यह हृदयाघात के खतरे को भी कम करता है। मधुमेह में भी तिल का सेवन लाभदायक है। तिल में भरपूर मात्रा में विटामिन और खनीज तत्व के अलावा कैल्शियम पाया जाता है। यह हड्डियों के लिए भी काफी फायदेमंद है। तिल आयुर्वेदिक के दृष्टिकोण से सेहत के लिए लाभप्रद तो है ही, इसका धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्व है। कहा जाता है कि संक्रान्ति के लिए तिल का दान सबसे शुभ माना गया है। क्योंकि मान्यता है कि तिल शनि देव को बहुत प्रिय है। तिल के जरिये इंसान अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों की माफी मांगता है, इस कारण लोग मकर संक्रांति के दिन का

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