चार राज्यों की 28 सीटों के नतीजे घोषित
नई दिल्ली ,(आरएनएस)। देश के चार राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के चुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 28 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतपत्रों के माध्यम से मतदान हुआ था। 27 अक्टूबर से मतगणना के परिणाम आने शुरू हुए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया) को नौ सीटें मिलीं। शेष तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।चारों राज्यों के नतीजों में अलग-अलग राजनीतिक दलों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी ने लगभग बराबर प्रदर्शन किया, जबकि बिहार में निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटें जीतीं। महाराष्ट्र में कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अलग-अलग गुटों को सफलता मिली। वहीं, कर्नाटक में भाजपा ने अपनी तीन सीटें बरकरार रखीं और जनता दल (सेक्युलर) ने एक सीट जीती।देश के छह राज्यों में विधान परिषदें हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। विधान परिषद के सभी सदस्यों का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती। संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत परिषद के सदस्यों का चुनाव अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों और माध्यमों से होता है। इनमें स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों, विधायकों, स्नातकों और शिक्षकों द्वारा चुने जाने वाले सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा कुछ सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं।
विधान परिषद के सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है। परिषद एक स्थायी सदन है, इसलिए इसे भंग नहीं किया जाता। प्रत्येक दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उनकी जगह नए सदस्यों का चुनाव किया जाता है। उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा ने अपनी छह सीटें बरकरार रखीं, जबकि समाजवादी पार्टी को पिछले चुनाव की तुलना में दो सीटों का फायदा हुआ। वर्ष 2020 में सपा के पास तीन सीटें थीं।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मेरठ और आगरा सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। इलाहाबाद-झांसी, वाराणसी और लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद सीटें भाजपा के खाते में गईं। वहीं, वाराणसी और आगरा-अलीगढ़ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सपा ने जीत दर्ज की।
इन परिणामों से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति बनाए रखी। सपा को मिली अतिरिक्त सीटें उसके लिए महत्वपूर्ण रहीं, जबकि भाजपा ने पिछली बार की अपनी सीटों की संख्या बरकरार रखी।
बिहार की आठ सीटों के चुनाव में भाजपा ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं, जबकि जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय जनता दल और जनसुराज पार्टी ने एक-एक सीट जीती।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में कोसी और दरभंगा सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की, जबकि पटना स्नातक सीट जनता दल (यूनाइटेड) के खाते में गई। तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में तिरहुत सीट भाजपा ने जीती। दरभंगा शिक्षक सीट पर जनसुराज पार्टी और पटना शिक्षक सीट पर राष्ट्रीय जनता दल ने जीत दर्ज की। सारण शिक्षक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई।
भाजपा ने अपनी तीनों सीटें बरकरार रखीं, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) ने पटना स्नातक सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा। राष्ट्रीय जनता दल ने पटना शिक्षक सीट जीतकर भाजपा को नुकसान पहुंचाया। वहीं, जनसुराज पार्टी ने विधान परिषद चुनाव में अपना खाता खोला। चुनाव में पांच मौजूदा सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा।
महाराष्ट्र की पांच सीटों के चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने एक-एक सीट जीती, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने दो सीटों पर जीत दर्ज की।
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत गोविंदराव वंजारी विजयी रहे। छत्रपति संभाजीनगर और पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने जीत हासिल की। पुणे शिक्षक सीट भाजपा और अमरावती शिक्षक सीट शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के खाते में गई।
नागपुर में कांग्रेस की जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह शहर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के साथ भाजपा के प्रमुख राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। वंजारी ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया। उन्होंने वर्ष 2020 में भी इस सीट पर जीत दर्ज की थी।
महाराष्ट्र के इन परिणामों में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) को उन सीटों पर सफलता मिली, जो पिछले चुनाव में कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों के पास थीं। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विभाजन के बाद शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को उन सीटों पर लाभ मिला, जहां पहले अविभाजित पार्टी ने जीत दर्ज की थी।
कर्नाटक की चार सीटों में भाजपा ने तीन और जनता दल (सेक्युलर) ने एक सीट पर जीत हासिल की। उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि बेंगलुरु शिक्षक सीट जनता दल (सेक्युलर) के खाते में गई। दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भी भाजपा ने जीत दर्ज की।
बेंगलुरु शिक्षक सीट पर कांग्रेस के पांच बार के विधान परिषद सदस्य पुट्टन्ना को जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा। वहीं, उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के पांच बार के विधान परिषद सदस्य शशिल जी. नमोशी ने कांग्रेस उम्मीदवार को पराजित किया।
कांग्रेस इस बार कर्नाटक की चारों सीटों में से एक भी नहीं जीत सकी। पार्टी को बेंगलुरु शिक्षक सीट भी गंवानी पड़ी, जबकि भाजपा ने अपनी तीनों सीटें बरकरार रखीं। जनता दल (सेक्युलर) की जीत ने राज्य में विधान परिषद के समीकरण को प्रभावित किया।
चारों राज्यों के चुनाव परिणामों में क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला लगभग बराबरी का रहा। बिहार में भाजपा ने तीन सीटें जीतकर अपनी स्थिति बनाए रखी, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवारों और छोटे दलों ने भी सफलता हासिल की। महाराष्ट्र में अलग-अलग दलों के बीच सीटों का बंटवारा हुआ, जबकि कर्नाटक में भाजपा ने अपना पिछला प्रदर्शन दोहराया।
कुल 28 सीटों में राजग को 16, विपक्षी इंडिया गठबंधन को नौ और निर्दलीय उम्मीदवारों को तीन सीटें मिलने के साथ इन चुनावों में अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां सामने आईं। हालांकि, स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता सामान्य विधानसभा चुनावों के मतदाताओं से अलग होते हैं। इसलिए इन नतीजों को संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के रुझान के रूप में देखना उचित होगा, न कि चारों राज्यों के समग्र जनमत का सीधा प्रतिबिंब।
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