चुनाव आयोग को 6 राज्यों में एसआईआर के दौरान मिले सिर्फ 1,600 विदेशी मतदाता

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नई दिल्ली (आरएनएस)। निर्वाचन आयोग की ओर से कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी विवाद के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि छह राज्यों में इस प्रक्रिया के दौरान करीब 1,600 विदेशी नागरिकों की पहचान हुई है। इन राज्यों में कुल 9.86 करोड़ मतदाता दर्ज थे। रिपोर्ट के अनुसार, पहचाने गए विदेशी नागरिकों की संख्या कुल मतदाताओं की तुलना में लगभग 0.02 प्रतिशत है। इस खुलासे के बाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के उद्देश्य और इसके दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, निर्वाचन आयोग ने पिछले वर्ष बिहार से विशेष गहन पुनरीक्षण की शुरुआत करते समय मतदाता सूची में शामिल अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान को इसका एक प्रमुख उद्देश्य बताया था। हालांकि, छह राज्यों से प्राप्त आंकड़ों में विदेशी नागरिकों की संख्या कुल मतदाताओं के मुकाबले काफी कम बताई गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि विदेशी नागरिकों की पहचान और मतदाता सूची में नाम होने की पुष्टि अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। केवल विदेशी नागरिक होने के आधार पर किसी व्यक्ति के मतदाता सूची में नाम होने की स्थिति या उसके मतदान करने के संबंध में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने उन 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क किया, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण पूरा हो चुका था या मतदाता सूची का प्रारूप जारी किया जा चुका था। इनमें से 11 राज्यों के अधिकारियों ने जवाब दिया। छह राज्यों ने विदेशी नागरिकों की संभावित संख्या बताई, जबकि चार राज्यों ने कहा कि वे इस संबंध में अलग से आंकड़े नहीं रखते।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि उसने राज्यों से विदेशी नागरिकों की संख्या के आंकड़े न तो मांगे थे और न ही उन्हें अलग से एकत्र करने का निर्देश दिया था। इससे इस प्रक्रिया के दौरान विदेशी नागरिकों की पहचान से जुड़े आंकड़ों की उपलब्धता और एकरूपता को लेकर सवाल उठे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में 716 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई। इनमें बेंगलुरु उत्तर क्षेत्र में 545 नेपाली नागरिक शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा दक्षिण कन्नड़ में 40, उत्तर कन्नड़ में 22 और उडुपी में 47 विदेशी नागरिकों का पता चला।
इन लोगों की नागरिकता नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैंड, नॉर्वे और फ्रांस सहित विभिन्न देशों से जुड़ी बताई गई है। कुछ लोगों के पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिक होने का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों के पास मतदाता पहचान पत्र थे, लेकिन जांच के दौरान वे स्कूल प्रमाणपत्र और संपत्ति संबंधी अभिलेख सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। हालांकि, इन मामलों में दस्तावेजों की कमी और नागरिकता की स्थिति के बीच अंतर को ध्यान में रखते हुए संबंधित प्राधिकारियों की जांच के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में अफगानिस्तान के तीन नागरिकों की पहचान की गई। मेघालय में नेपाल के दो पुरुषों का पता चला, जिन्होंने भारतीय महिलाओं से विवाह किया था।
केरल में करीब 500 ऐसे लोगों का उल्लेख किया गया है, जिनके पास विदेशी नागरिकता होने के बावजूद उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज थे। वहीं, गोवा में विदेशी पासपोर्ट रखने वाले 419 लोगों की पहचान किए जाने की बात कही गई है।
दूसरी ओर, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने कहा कि उनके पास विदेशी नागरिकों से संबंधित ऐसे अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ओडिशा ने विदेशी नागरिकों की पहचान होने की बात कही, लेकिन उनकी संख्या का संकलन नहीं किए जाने की जानकारी दी।
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान विभिन्न राज्यों की मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है। हालांकि, हटाए गए सभी नामों को विदेशी नागरिकों से जोडक़र नहीं देखा जा सकता। मतदाता सूची से नाम हटने के कारणों में मृत मतदाता, स्थान बदलने वाले व्यक्ति, दोहरी प्रविष्टियां और अन्य पात्रता संबंधी कारण भी शामिल हो सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में अंतिम मतदाता सूची से करीब 90 लाख नाम हटाए गए, जबकि झारखंड में लगभग 40 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए।
मेघालय की अंतिम मतदाता सूची में 20.18 लाख नाम दर्ज थे, जिनमें से करीब 1.65 लाख नाम हटाए गए। केरल में लगभग 2.6 करोड़ मतदाताओं की सूची से 8.97 लाख नाम हटाए गए। गोवा में करीब 10 लाख नामों वाली सूची से 1.27 लाख नाम हटाए गए, जबकि मिजोरम में 8.35 लाख मतदाताओं में से लगभग 39 हजार नाम हटाए जाने की जानकारी दी गई है।
विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाकर पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। हालांकि, विदेशी नागरिकों की पहचान से जुड़े सीमित आंकड़ों और विभिन्न राज्यों में उपलब्ध जानकारी के अंतर ने इस प्रक्रिया के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर चर्चा को बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए नागरिकता, निवास और मतदाता पात्रता से संबंधित नियमों का स्पष्ट एवं समान रूप से पालन आवश्यक है। साथ ही, नाम हटाने की प्रक्रिया में प्रभावित व्यक्तियों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर देना भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों और विभिन्न राज्यों की जानकारी के आधार पर विशेष गहन पुनरीक्षण के परिणामों का व्यापक आकलन किया जा रहा है। विदेशी नागरिकों की पहचान, मतदाता सूची से नाम हटाने के कारणों और संबंधित मामलों की अंतिम स्थिति के बारे में स्पष्ट निष्कर्ष आधिकारिक अभिलेखों तथा जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।

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