नई दिल्ली (आरएनएस)। देश में पिछले दो महीनों के दौरान हुए साइबर हमलों में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से करीब 300 करोड़ रुपये की कथित निकासी का मामला सामने आया है। इन घटनाओं के संबंध में लगभग 150 शिकायतें दर्ज की गई हैं या प्राथमिकी दर्ज हुई हैं। प्रभावित कंपनियों में ज्यादातर छोटी ऋण देने वाली संस्थाएं शामिल हैं। पिछले छह सप्ताह के दौरान साइबर हमलों में तेजी आई है और कुछ कंपनियों को एक से अधिक बार निशाना बनाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, साइबर हमलों से प्रभावित अधिकांश गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का सालाना कारोबार करीब एक हजार करोड़ रुपये या इससे कम है। जांच अधिकारियों ने इन कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियां पाई हैं। इन कमजोरियों का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने भुगतान प्रणालियों को निशाना बनाया और बड़ी रकम निकालने में सफलता हासिल की। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली स्थित एक कंपनी को पहली साइबर घटना में कथित तौर पर 7.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके कुछ दिन बाद ही कंपनी पर दोबारा हमला किया गया, जिसमें लगभग 7.25 करोड़ रुपये की राशि निकाल ली गई। इस तरह कंपनी को दोनों घटनाओं में कुल 14.75 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है। शिकायतों के शहरवार आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में करीब 30, दिल्ली में 25 से अधिक और चेन्नई में 15 से 16 मामले दर्ज किए गए हैं। इन घटनाओं की जांच की जा रही है। हालांकि, कथित तौर पर निकाली गई कुल 300 करोड़ रुपये की राशि के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक आकलन उपलब्ध नहीं है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी सीधे हमला करने के बजाय पहले संबंधित कंपनियों के भुगतान तंत्र और सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का पता लगाते हैं। इसके बाद वे इन खामियों का फायदा उठाकर धनराशि निकालने की योजना तैयार करते हैं। इस प्रारंभिक तैयारी में लगभग 10 से 12 दिन लग सकते हैं।
कुछ मामलों की जांच के दौरान अधिकारियों ने ‘साइबरस्ट्राइक’ नामक एक हैकिंग मंच की पहचान की है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन हमलों के पीछे कौन लोग या समूह शामिल हैं और क्या अलग-अलग कंपनियों पर हुए हमलों के बीच कोई साझा संबंध है।
भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रर्तििक्रया दल (सीईआरटी-इन) ने 9 अक्टूबर को वित्तीय संस्थानों को संभावित साइबर हमलों के प्रति सतर्क करते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी थी। इसके बाद 15 अक्टूबर को जारी एक अन्य परामर्श में बताया गया कि साइबर अपराधी सुरक्षा संबंधी कमजोरियों का पता लगाने और उनका फायदा उठाने के लिए सार्वजनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
सीईआरटी-इन के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों के दुरुपयोग से कुछ मामलों में हमला शुरू करने और नुकसान पहुंचाने के बीच का समय कई दिनों से घटकर कुछ घंटे रह गया है। इससे वित्तीय संस्थानों के सामने साइबर सुरक्षा की चुनौती और गंभीर हो गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा और वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम से संबंधित नियम एवं दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। इसके बावजूद हालिया घटनाओं ने छोटी वित्तीय कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, वित्तीय संस्थानों को अपने भुगतान तंत्र की नियमित जांच, सॉफ्टवेयर को समय पर अद्यतन करने, संदिग्ध लेनदेन की निगरानी और सुरक्षा संबंधी खामियों को तत्काल दूर करने पर विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही, साइबर हमलों का पता लगाने और उनके प्रभाव को सीमित करने के लिए त्वरित प्रर्तििक्रया तंत्र विकसित करना भी जरूरी है।
फिलहाल, इन घटनाओं में कथित तौर पर निकाली गई 300 करोड़ रुपये की कुल राशि की आधिकारिक पुष्टि और अंतिम आकलन होना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही नुकसान की वास्तविक मात्रा तथा हमलों के पीछे र्सिक्रय गिरोहों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।








