नई दिल्ली ,26 सितंबर ,(आरएनएस)। देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में आगामी प्लेसमेंट सीजन शुरू होने से ठीक पहले बड़ा और सख्त फैसला लिया गया है। छात्रों को नौकरी का ऑफर लेटर देकर बाद में मुकरने वाली 22 कंपनियों को अगले दो वर्षों के लिए कैंपस प्लेसमेंट प्रक्रिया से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इन कंपनियों ने पिछले शैक्षणिक सत्र में 2026 बैच के छात्रों को जॉब ऑफर तो थमा दिए, लेकिन बाद में मंदी या आंतरिक कारणों का हवाला देते हुए उन्हें पूरा नहीं किया या सीधे वापस ले लिया। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते प्रभावित छात्रों को भारी मानसिक व करियर संबंधी तनाव झेलना पड़ा, जिसे देखते हुए संस्थानों ने यह संयुक्त कड़ा रुख अपनाया है।
आईआईटी गुवाहाटी में एआईपीसी की बैठक में लिया गया कड़ा फैसला
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ रोकने के लिए यह सख्त कदम इसी महीने की शुरुआत में आईआईटी गुवाहाटी में आयोजित ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी की बैठक में उठाया गया। आईआईटी वह शीर्ष निकाय है जो देश के सभी 23 आईआईटी परिसरों में प्लेसमेंट और इंटर्नशिप के नियम व दिशा-निर्देश तय करता है। हालांकि, पैनल ने तकनीकी रूप से इसे ‘ब्लैकलिस्टिंग’ की जगह ‘नॉन-कोऑपरेशन’ (असहयोग) की श्रेणी में रखा है। एआईपीसी समन्वयक और आईआईटी गुवाहाटी के एसोसिएट प्रोफेसर जॉन जोस के अनुसार, इन 22 कंपनियों के चलते 23 आईआईटी संस्थानों के 150 से अधिक ऑफर प्रभावित हुए हैं। कुछ कंपनियों ने तो अकेले 10 से 15 तक ऑफर रद्द कर दिए।
दिग्गज टेक फर्म और स्टार्टअप्स पर गिरी गाज, ओरेकल का नाम भी चर्चा में
कैंपस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रभावित कंपनियों में अमेरिकी टेक दिग्गज ओरेकल का नाम भी प्रमुखता से शामिल है, जिस पर दो साल के लिए असहयोग की कार्रवाई की गई है। कंपनी पर कथित तौर पर आईआईटी छात्रों को दिए गए लगभग 40 ऑफर्स को पूरा न करने का आरोप है। वैश्विक स्तर पर की गई बड़े पैमाने की छंटनी का असर भारतीय कैंपस भर्तियों पर भी दिखा। इसके अलावा लिस्ट में कई बड़े और चर्चित स्टार्टअप्स भी शामिल हैं, जिन्होंने कैंपस में मोटी सैलरी पैकेज के वादे तो किए लेकिन समय आने पर छात्रों को ज्वाइनिंग देने से हाथ पीछे खींच लिए।
प्रभावित छात्रों के लिए आगे आए संस्थान, 30त्न को मिली दूसरी नौकरियां
ऑफर रद्द होने से मुश्किल में फंसे छात्रों के लिए आईआईटी प्रशासन ने तुरंत बैकअप योजना पर काम शुरू किया है। प्लेसमेंट दफ्तरों ने प्रभावित छात्रों के सीवी अन्य रिक्रूटर्स और कॉर्पोरेट नेटवर्क के बीच सर्कुलेट किए हैं, जिसके सकारात्मक नतीजे भी मिले हैं। अनुमान के मुताबिक, करीब 20 से 30 फीसदी छात्रों को वैकल्पिक माध्यमों और ऑफ-कैंपस ड्राइव के जरिए नई नौकरियां मिल चुकी हैं। आईआईटी अधिकारियों का कहना है कि आगामी प्लेसमेंट सीजन में छात्रों के हितों की रक्षा के लिए नियमों को और अधिक कड़ा किया जा रहा है ताकि कोई भी कंपनी रिक्रूटमेंट प्रक्रिया को हल्के में न ले सके।








