नई दिल्ली (आरएनएस)। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने मौसम तंत्र के प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तट से गुजर चुका गहरा अवदाब धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। इसके आज शाम तक सामान्य अवदाब और 26 सितंबर की सुबह तक कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने की संभावना है। हालांकि, इसके कमजोर होने के बाद भी कई क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रह सकती है।
इसी बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दिल्ली से विदाई ले ली है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से भी मानसून वापस लौट चुका है।गहरे अवदाब का सबसे अधिक प्रभाव ओडिशा में दिखाई दे रहा है। राज्य में 24 से 26 सितंबर तक और कुछ स्थानों पर 27 सितंबर को भी भारी बारिश होने की संभावना है। दक्षिणी ओडिशा तथा उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे रहने तथा झोंकों के साथ 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।मौसम विभाग ने खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है।पूर्वी और मध्य भारत के अन्य हिस्सों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और विदर्भ में कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।मध्य प्रदेश में 25 और 26 सितंबर को बारिश का प्रभाव अधिक रहने की संभावना है, विशेषकर राज्य के पूर्वी हिस्सों में। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी तरह विदाई में अभी करीब छह दिन का समय लग सकता है।बिहार में भी मानसूनी गतिविधियां बनी हुई हैं। किशनगंज से चंपारण तक कई जिलों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है। निचले इलाकों में जलभराव, यातायात बाधित होने और कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बनने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन दलों को भी तैयार रखा गया है।
पूर्वोत्तर भारत में सिक्किम, पश्चिमी असम और मेघालय में बारिश होने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश में बुधवार को अचानक मौसम में बदलाव देखने को मिला। बुंदेलखंड से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश हुई और तापमान में गिरावट दर्ज की गई। कानपुर, झांसी, बांदा, बलिया और हरदोई समेत कई जिलों में मौसम प्रभावित रहा।
मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के 20 जिलों में गरज-चमक, 25 जिलों में तेज हवाओं और 36 जिलों में बिजली गिरने की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की है।
गोरखपुर, अयोध्या, रायबरेली और प्रयागराज में बारिश होने की संभावना है। 25 और 26 सितंबर को बारिश का प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक पहुंच सकता है। 26 सितंबर को प्रदेश के कई हिस्सों के लिए भारी बारिश की नारंगी चेतावनी जारी की गई है। इसका प्रभाव 28 सितंबर तक बने रहने की संभावना है। अगले पांच दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 4 से 7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है।
पहाड़ी क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में 29 सितंबर तक बारिश होने की संभावना है।
26 और 27 सितंबर के आसपास उत्तराखंड, चंडीगढ़, अंबाला, करनाल और पंचकूला में हल्की बारिश हो सकती है। पंजाब और हरियाणा में अगले दो दिनों तक मौसम गर्म और शुष्क रहने का अनुमान है, जबकि 26 और 27 सितंबर के आसपास इन क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून दिल्ली से वापस लौट गया है। मानसून पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से भी विदा हो चुका है। इनमें गुरदासपुर, चंडीगढ़, अलीगढ़ और उदयपुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 1 जून से 23 सितंबर के बीच देश में कुल 713.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 837.7 मिलीमीटर मानी जाती है। इस तरह देश में अब तक सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
सबसे कम बारिश वाले राज्यों में मेघालय में सामान्य से 59 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। इसके बाद मणिपुर में 44 प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेश में 42 प्रतिशत, पंजाब में 40 प्रतिशत और पुडुचेरी में 38 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
वहीं पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर में बारिश सामान्य के सबसे करीब रही। दोनों क्षेत्रों में सामान्य से करीब एक प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। उत्तराखंड में सामान्य से दो प्रतिशत अधिक, दिल्ली में पांच प्रतिशत अधिक और छत्तीसगढ़ में पांच प्रतिशत कम बारिश हुई है।
मौसम विभाग ने लोगों से गरज-चमक के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की है। बिजली कडक़ने के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले मैदानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। लोगों को जलभराव वाली सडक़ों और निचले इलाकों में जाने से बचने को कहा गया है।
किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों को भी खराब मौसम के दौरान अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। पहाड़ी राज्यों की यात्रा करने वाले लोगों को घर से निकलने से पहले मौसम और सडक़ की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
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