जंतर-मंतर बवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कमेटी बदलने से किया इनकार

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नई दिल्ली ,17 सितंबर ,(आरएनएस)। जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान भडक़ी हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गठित हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी को जांच तेजी से आगे बढ़ाने के कड़े निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमेटी के सदस्यों में किसी भी तरह का बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने जांच का दायरा तय करते हुए स्पष्ट किया कि कमेटी सबसे पहले प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने, कथित बदसलूकी और दोनों पक्षों की ओर से संपत्ति को पहुंचे नुकसान की जांच को प्राथमिकता दे।
जांच शुरू होने से पहले कमेटी पर शक करना जल्दबाजी: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं ने एचपीईसी की संरचना पर सवाल उठाते हुए इसके पुनर्गठन की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कमेटी ने अभी अपनी जांच शुरू भी नहीं की है, ऐसे में किसी पूर्वाग्रह या पूर्वधारणा के आधार पर सवाल उठाना पूरी तरह जल्दबाजी होगी। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि एचपीईसी किसी एक पक्ष के हित में नहीं, बल्कि अदालत की निष्पक्ष और पारदर्शी सहायता के लिए बनाई गई है। इसके साथ ही प्रशासनिक कामकाज के लिए कमेटी में जल्द एक मेंबर सेक्रेटरी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
गवाहों की पहचान रहेगी पूरी तरह गुप्त, बनेगा अलग ऑनलाइन पोर्टल
अदालत ने एचपीईसी को सख्त हिदायत दी कि जांच के दौरान सामने आने वाले संवेदनशील और कमजोर गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनकी पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाए। उनके बयान और पेश किए गए साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए कोर्ट ने एक अलग ऑनलाइन पोर्टल तैयार करने का सुझाव दिया, ताकि गवाह बिना किसी डर या दबाव के अपने दस्तावेज और डिजिटल सबूत सीधे जमा कर सकें। मामले में कोर्ट की सहायता और पक्षों के बीच स्वतंत्र मध्यस्थता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन और एओआर सी. सोलोमन को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है।
14 साल की प्रदर्शनकारी को जान का खतरा, दिल्ली पुलिस देगी सुरक्षा
सुनवाई के दौरान 14 साल की एक नाबालिग प्रदर्शनकारी की सुरक्षा का मामला भी कोर्ट के सामने उठा। अदालत को बताया गया कि लडक़ी और उसके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को तुरंत खतरे का आकलन कर परिवार को पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया। साथ ही धमकी देने वालों के खिलाफ त्वरित जांच कर अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। अदालत अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को करेगी

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