नई दिल्ली, (आरएनएस)। मणिपुर में वर्ष 2023 में हुई हिंसा के बाद राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और उनकी स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। न्यायालय ने राहत शिविरों में हुई 25 असामान्य मौतों और कथित यौन उत्पीडऩ की घटना का संज्ञान लेते हुए मणिपुर के मुख्य सचिव को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ मणिपुर में वर्ष 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े यौन हिंसा के मामलों की जांच और सुनवाई से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राज्य सरकार से कार्रवाई का विवरण मांगा और कहा, अपने मुख्य सचिव से कहिए कि न्यायालय को आदेश देने के लिए मजबूर न करें। हमें बताइए कि आपने क्या कदम उठाए हैं। न्यायालय ने मुख्य सचिव को राहत शिविरों में हुई सभी 25 असामान्य मौतों का पूरा विवरण, शव परीक्षण रिपोर्ट और मृत्यु के कारणों को स्पष्ट करने वाले अन्य संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
पीठ ने राज्य सरकार से यह भी बताने को कहा कि विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। न्यायालय ने राहत शिविरों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं तथा दैनिक जीवन के लिए आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।
न्यायालय ने समिति की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के अनुसार, आठ जिलों के राहत शिविरों में कुल 640 मौतों की सूचना दी गई थी, लेकिन केवल 20 मामलों में ही शव परीक्षण कराया गया। पीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि शेष मामलों में शव परीक्षण क्यों नहीं कराया गया और कुछ मामलों में केवल 20 हजार से 30 हजार रुपये तक का मुआवजा क्यों दिया गया।
न्यायालय ने मणिपुर विधिक सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश दिया कि असामान्य मौतों के सभी मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने, मौत के कारणों का उचित पता लगाने और पहले से दर्ज मामलों की जांच तेजी से पूरी कराने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। साथ ही राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों और पीडि़तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जांच की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आठ जिलों में 42 विशेष जांच दल गठित किए गए हैं और कुल 3,020 मामले जांच के अधीन हैं। इनमें 302 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि 1,583 मामलों में अंतिम रिपोर्ट पेश की गई है। 1,135 मामलों में जांच जारी है और 33 मामलों में मुकदमे की कार्यवाही शुरू हो चुकी है।
पीठ को यह भी बताया गया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो 31 मामलों की जांच कर रहा है। इन मामलों में आरोपपत्र दाखिल करने और अंतिम रिपोर्ट से संबंधित कार्रवाई भी आगे बढ़ाई गई है। न्यायालय ने मामलों की सुनवाई में तेजी लाने पर भी जोर दिया।
पीडि़तों की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि गुवाहाटी की विशेष अदालत में मामलों की सुनवाई सप्ताह में केवल दो दिन हो रही है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सप्ताह में दो दिन सुनवाई होने से भी मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जुड़े मामलों के लिए दो अदालतें उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए।
मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से हिंसा की छिटपुट घटनाएं जारी हैं। हाल में 15 सितंबर की रात तामेंगलांग में अज्ञात बंदूकधारियों ने दो कुकी महिलाओं की हत्या कर दी थी। इससे पहले 13 सितंबर को तामेंगलांग और नोनी जिलों में चार कुकी नागरिकों की हत्या की घटना सामने आई थी। 27 अगस्त को कांगपोकपी जिले में चार नागा नागरिकों की हत्या की भी सूचना मिली थी।
न्यायालय में सुनवाई ऐसे समय हुई है जब राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा, पुनर्वास और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मई 2023 से मणिपुर में हिंसा से संबंधित घटनाओं में 306 लोगों की मौत हुई है और 49 लोग अब भी लापता बताए गए हैं।
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