नई दिल्ली,(आरएनएस)। अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा एच5एन1 के संभावित खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एशिया-प्रशांत देशों से अपनी तैयारी और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की अपील की है। भारत के लिए यह चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में एक ओर मौसमी एच1एन1 इन्फ्लूएंजा के मामले सामने आते हैं, वहीं दूसरी ओर पक्षियों में बर्ड फ्लू के प्रकोप की घटनाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। हाल ही में राष्ट्रीय इन्फ्लूएंजा केंद्र और इन्फ्लूएंजा निगरानी से जुड़ी 19वीं क्षेत्रीय बैठक आयोजित की गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रीय कार्यालयों की ओर से 25 से 27 अगस्त तक आयोजित बैठक में 150 से अधिक इन्फ्लूएंजा विशेषज्ञों, प्रयोगशाला वैज्ञानिकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में पक्षियों में एच5एन1 के लगातार प्रसार और पशुओं से मनुष्यों में संक्रमण पहुंचने की संभावना के बीच निगरानी से प्राप्त आंकड़ों को तेजी से सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों में इस्तेमाल करने के तरीकों पर चर्चा हुई।
भारत में पोल्ट्री और अन्य पक्षियों में बर्ड फ्लू के प्रकोप की घटनाएं सामने आती रही हैं। केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 और 2025 में भी एवियन इन्फ्लूएंजा के प्रकोप की जानकारी दी थी।
हाल में केरल के कुछ पोल्ट्री फार्मों में एच5एन1 के 11 मामले सामने आए थे। इस दौरान 54 हजार से अधिक पक्षियों की मौत हुई और संक्रमण को रोकने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर बड़ी संख्या में अन्य पक्षियों को भी नष्ट किया गया।
हालांकि आम आबादी के लिए एच5एन1 का जोखिम फिलहाल कम माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञ लगातार निगरानी को जरूरी बता रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 से 2024 के बीच भारत में एच5एन1 संक्रमण से एक व्यक्ति की मौत हुई थी, जबकि वर्ष 2025 में दो मौतें दर्ज की गईं। हालांकि, 2026 में अब तक भारत में मनुष्यों में एच5एन1 संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है।
संक्रामक रोग विशेषज्ञ और चिकित्सकीय सूक्ष्म जीव विज्ञानी डॉ. मनाली अग्रवाल ने बताया कि एच5एन1 इन्फ्लूएंजा वायरस का एक उपप्रकार है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है और कुछ परिस्थितियों में स्तनधारियों तथा मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्यों में संक्रमण आमतौर पर संक्रमित पक्षियों या अन्य जानवरों के सीधे संपर्क में आने तथा दूषित वातावरण के संपर्क से जुड़ा होता है। एच5एन1 सामान्य परिस्थितियों में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता है और मानव से मानव में लगातार संक्रमण की सूचना नहीं मिली है।
डॉ. मनाली के अनुसार, संक्रमण के ज्यादातर मामले संक्रमित पोल्ट्री को सीधे छूने, बीमार पक्षियों को मारने या भोजन के लिए तैयार करने तथा संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने से जुड़े होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पक्षियों से मनुष्यों में संक्रमण वायरस के श्वसन मार्ग, पाचन तंत्र या आंखों की बाहरी झिल्ली के माध्यम से पहुंच सकता है।
एच5एन1 संक्रमण में बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी और फेफड़ों में निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा दस्त, उल्टी और पेट दर्द जैसे गैर-श्वसन संबंधी लक्षण भी सामने आ सकते हैं।
डॉ. मनाली ने कहा कि यह पता लगाने के लिए निगरानी और जांच बेहद जरूरी है कि कौन से इन्फ्लूएंजा वायरस फैल रहे हैं और उनका मानव स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। इससे महामारी की तैयारी और नागरिकों की सुरक्षा में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों ने एच5एन1 से बचाव के लिए लोगों को कुछ सामान्य सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
* बीमार या मृत पक्षियों और जानवरों के अनावश्यक संपर्क से बचें। बीमार दिखने वाले या अचानक मरे पक्षियों को न छुएं, न काटें, न कहीं ले जाएं और न ही उनका सेवन करें।
* पोल्ट्री फार्मों में काम करने वाले किसानों, श्रमिकों, पशु चिकित्सकों और पशु स्वास्थ्य से जुड़े कर्मचारियों को आवश्यक होने पर उचित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए।
* पक्षियों, जानवरों या दूषित सतहों के संपर्क में आने के बाद हाथ अच्छी तरह साफ करें।
* बिना धुले हाथों से आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
* अच्छी तरह पकाया गया पोल्ट्री मांस और अंडे सामान्य रूप से सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन कच्चे या अधपके पोल्ट्री उत्पादों से बचना चाहिए।
* बिना पाश्चुरीकृत दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।
* पक्षियों की असामान्य मौत की सूचना स्वयं मृत पक्षी उठाने के बजाय पशु चिकित्सकों या सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को दें।
* बीमार या मृत पक्षियों के संपर्क में आने के बाद बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी, आंखों में संक्रमण या इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें और चिकित्सक को पक्षियों के संपर्क की जानकारी दें।
विशेषज्ञों का कहना है कि एच1एन1 और एच5एन1 के शुरुआती लक्षण कुछ हद तक एक जैसे हो सकते हैं। इसलिए समय पर पहचान, सही जांच, आवश्यकता पडऩे पर अलग रखना और समय पर विषाणुरोधी उपचार महत्वपूर्ण हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य से जुड़े विभागों के बीच समन्वय वाली ‘एक स्वास्थ्य’ व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों के खतरे की शुरुआती पहचान करना और उनके व्यापक प्रसार से पहले कार्रवाई करना है।
संगठन के अनुसार, फिलहाल एच5एन1 के मनुष्य से मनुष्य में लगातार फैलने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि इन्फ्लूएंजा वायरस में समय के साथ बदलाव हो सकते हैं, इसलिए लगातार निगरानी जरूरी है।
एशियाई आपात चिकित्सा सोसायटी और भारतीय आपात चिकित्सा सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. तमोरिश कोले ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की








