नई दिल्ली,(आरएनएस)। नीट पेपर लीक के विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन और 20 जुलाई के संसद मार्च को लेकर 36 दिनों तक भूख हड़ताल करने वाले प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का बड़ा बयान सामने आया है। सोनम वांगचुक ने खुलासा किया है कि वह अपने अनशन को सम्मानजनक तरीके से समाप्त करना चाहते थे और उनकी इच्छा थी कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी उन्हें जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाएं। इसके साथ ही उन्होंने 20 जुलाई के संसद मार्च के वास्तविक प्लान की जानकारी भी साझा की।
20 जुलाई को संसद मार्च का यह था पूरा प्लान
सोनम वांगचुक ने बताया कि उन्होंने आंदोलनकारियों से कहा था कि वह 12 दिन और अनशन जारी रख सकते हैं, जिसके बाद 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालकर सांसदों को ज्ञापन सौंपने की रणनीति बनाई गई थी। मार्च में भीड़ को लेकर सहयोगियों का अनुमान 10 से 15 हजार लोगों का था, लेकिन वांगचुक के अनुसार प्रदर्शन में एक लाख से अधिक लोग जुटे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का मकसद किसी भी तरह की तोडफ़ोड़ या उपद्रव करना बिल्कुल नहीं था।
‘विपक्ष के नेता अनशन तुड़वाकर आगे की जिम्मेदारी लें’
वांगचुक ने कहा कि योजना के तहत यदि सत्ता पक्ष से कोई सकारात्मक पहल नहीं होती, तो वे विपक्षी सांसदों से मिलने वाले थे। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा भी मंच पर पहुंचे थे। रणनीति यह थी कि संसद पहुंचकर पूरा मामला सांसदों के सुपुर्द कर दिया जाए और उनसे कहा जाए कि अब वे इस मसले को संसद के पटल पर उठाकर समाधान निकालें। इसी कड़ी में योजना बनी थी कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी आकर अनशन समाप्त करवाएं और आगे की लड़ाई की कमान संभालें, लेकिन 18 तारीख को ही प्रशासन ने उन्हें जबरन वहां से हटा दिया।
अभिजीत दीपके का आरोप: ‘सोनम वांगचुक को किडनैप करवा लिया गया था’
दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि सोनम वांगचुक इस पूरे प्रदर्शन का मुख्य चेहरा थे। उनकी तेजी से बिगड़ती सेहत को लेकर सभी चिंतित थे, लेकिन वह पीछे हटने को तैयार नहीं थे। दीपके ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बाद में वांगचुक को जबरन उठा लिया गया (किडनैप करवा लिया गया) और ऐसी जगह रखा गया जहां केवल सरकारी प्रतिनिधियों को ही उनसे मिलने की इजाजत थी। आंदोलन से जुड़े साथियों को मिलने नहीं दिया गया, जिसके चलते अंतत: उन्हें सरकारी अधिकारियों के हाथों ही अनशन तोडऩा पड़ा।
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