नई दिल्ली(आरएनएस)। इस वर्ष मानसून का असमान रूप देश के कई हिस्सों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। नेपाल, ओडिशा और गुजरात सहित कई क्षेत्रों में अचानक हुई भारी बारिश के कारण बाढ़ की गंभीर स्थिति बनी, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ और आधारभूत ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा। वहीं, देश के कई अन्य हिस्से अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव का असर किसानों, सब्जी विक्रेताओं और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई दे रहा है। अधिक बारिश से फसलें खराब होने और फल-सब्जियों के जल्दी खराब होने से किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। इसका असर बाजार की कीमतों के साथ-साथ आम परिवारों के घरेलू बजट पर भी पड़ रहा है।नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही के बाद बिहार के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। खगडिय़ा और चंपारण सहित कई इलाकों में बारिश का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, बारिश का दौर 1 सितंबर तक जारी रहने की संभावना है।
बिहार के आठ जिलों को विशेष सतर्कता के दायरे में रखा गया है। पश्चिम बंगाल और झारखंड के कुछ इलाकों में भी 29 से 31 अगस्त के बीच भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मौजूदा मौसम प्रणाली के कमजोर पडऩे के बाद मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में कमी आ सकती है।
ओडिशा में बाढ़ की स्थिति से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं। केंद्रापड़ा, भद्रक और जाजपुर सहित तीन जिलों में करीब 76 हजार लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।
राज्य में इस मानसून के दौरान दो बार बाढ़ की स्थिति बन चुकी है। बाढ़ का दूसरा दौर 13 अगस्त से शुरू हुआ था और अब तक करीब 1,895 गांवों के 13,50,306 लोग प्रभावित हुए हैं।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ है। राज्य की प्रमुख नदियों में जलस्तर अब घट रहा है और अधिकांश स्थानों पर यह खतरे के निशान से काफी नीचे है। इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है, क्योंकि मौसम विभाग ने 2 सितंबर तक राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है।
मौसम विभाग के अनुसार, एक नई मौसम प्रणाली बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से सितंबर की शुरुआत में पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
मौजूदा मौसम प्रणाली के कमजोर पडऩे के बाद इन क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। वहीं, दक्षिणी और पश्चिमी भारत में मौसम अपेक्षाकृत अलग-अलग रहने की संभावना है।
कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। नम हवाओं के प्रभाव से तटीय क्षेत्रों में स्थानीय बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पडऩे का सिलसिला जारी रह सकता है। हालांकि, मानसून की सबसे अधिक सक्रियता मध्य, पूर्वी और उत्तरी भारत के हिस्सों में बनी रहने की संभावना है।
मौसम विभाग के वैज्ञानिक अखिल श्रीवास्तव के अनुसार, अगले कुछ दिनों में दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बारिश की संभावना कम रहेगी। राजधानी में आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस दौरान हवा की गति करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है।
पिछले दिनों हुई बारिश ने राजधानी के लोगों को गर्मी से राहत दी थी, लेकिन अब दिन के तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है। इसके चलते लोगों को गर्मी के साथ उमस का भी सामना करना पड़ सकता है।
मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अगले तीन से चार दिनों के दौरान बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। 1 सितंबर तक पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
देश में कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति के बावजूद कई हिस्से अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। उपलब्ध वर्षा आंकड़ों के अनुसार, बिहार में करीब 42 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। वहीं, दक्षिण भारत के स्तर पर भी करीब 25 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य 6.3 मिलीमीटर के मुकाबले 13.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 110 प्रतिशत अधिक है।
पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का वितरण असमान रहा है। त्रिपुरा में सामान्य 9.9 मिलीमीटर के मुकाबले 36.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 271 प्रतिशत अधिक है।
मिजोरम में सामान्य 12.9 मिलीमीटर की तुलना में 28.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से करीब 122 प्रतिशत अधिक है।
इसके विपरीत, दिल्ली में सामान्य 5.6 मिलीमीटर के मुकाबले केवल 1.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 73 प्रतिशत कम है। हरियाणा में सामान्य 5.7 मिलीमीटर के मुकाबले 0.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जो करीब 87 प्रतिशत कम है। पंजाब में भी सामान्य वर्षा की तुलना में बेहद कम बारिश दर्ज की गई।
वर्षा के आंकड़ों से देश में मानसून के असमान वितरण की तस्वीर स्पष्ट होती है। बताया गया है कि देश के करीब 46 प्रतिशत क्षेत्र को कवर करने वाले 18 राज्य बहुत कम बारिश वाली श्रेणी में हैं, जबकि नौ राज्यों को कम बारिश वाली श्रेणी में रखा गया है।
एक ओर कुछ राज्यों में अत्यधिक बारिश के कारण बाढ़ और जनजीवन प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर कई राज्यों में बारिश की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिए चुनौती बनी हुई है। मानसून के इस असमान व्यवहार ने किसानों, बाजारों और आम लोगों के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।








