रांची, (आरएनएस)। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन शनिवार को 15वें दिन भी जारी रहा। छात्रों और सरकार के बीच शनिवार को दूसरी बार हुई वार्ता में भी कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, छात्रों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से सुना है और अब वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ प्रस्तावित चर्चा का इंतजार करेंगे। इसके बाद ही भूख हड़ताल और आंदोलन समाप्त करने पर निर्णय लिया जाएगा।
जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच का प्रतिनिधिमंडल शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे रांची के मोराबादी स्थित अतिथि गृह पहुंचा। करीब 11:30 बजे सरकार के प्रतिनिधियों के साथ उनकी वार्ता शुरू हुई। सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, चामरा लिंडा, दीपिका सिंह पांडे और संजय यादव वार्ता में शामिल हुए।
छात्र प्रतिनिधि चंदन राजक ने बताया कि बैठक में छात्रों ने अपनी सभी प्रमुख मांगें सरकार के समक्ष रखीं। सरकार ने मांगों को सुना है और उन्हें मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का आश्वासन दिया है।
उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक भूख हड़ताल और आंदोलन समाप्त करने का निर्णय नहीं लिया जाएगा।
छात्र प्रतिनिधिमंडल में रवींद्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे।
छात्रों और अन्य हितधारकों से सुझाव एवं प्रतिक्रियाएं प्राप्त करने के लिए झारखंड सरकार ने एक ई-मेल पता भी जारी किया है। सरकार का कहना है कि छात्र, अभ्यर्थी या अन्य संबंधित व्यक्ति अपनी चिंताएं और सुझाव इसके माध्यम से सरकार तक पहुंचा सकते हैं।
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार छात्र संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ लगातार बैठकें करती रहेगी। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझावों के आधार पर सरकार नीति और सामूहिक निर्णय तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी तथा छात्रों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
इधर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता भी शनिवार को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले। पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। कुछ कार्यकर्ता सडक़ पर लेट गए, जबकि कुछ पुलिस वाहनों पर चढ़ गए।
प्रदर्शन में शामिल एक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार छात्रों के आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन से जुड़े कुछ साथियों को गिरफ्तार किया गया है। कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर राज्य के युवाओं के भविष्य को प्रभावित करने का आरोप भी लगाया।
झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला अब उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर की है।
याचिका में 19 अप्रैल को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, उत्तर पुस्तिका की अभिरक्षा तथा मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की भी जांच कराने की मांग की गई है।
आंदोलन कर रहे छात्र जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करना, जेपीएससी और जेएसएससी में संरचनात्मक सुधार करना तथा भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराना शामिल है।
छात्र यह भी मांग कर रहे हैं कि जांच सीबीआई से कराई जाए अथवा झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की स्वतंत्र समिति गठित कर मामले की जांच कराई जाए। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल किए बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।








