नई दिल्ली (आरएनएस)। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आगामी सप्ताह के दौरान देशभर में मानसून के सक्रिय बने रहने का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार उत्तर भारत, पूर्वोत्तर, पूर्वी, पश्चिमी तटीय तथा मध्य भारत के अनेक क्षेत्रों में अ‘छी वर्षा होने की संभावना है। कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी वर्षा, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने का भी पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने लोगों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में इस सप्ताह व्यापक वर्षा होने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा के साथ तेज हवाएं और वज्रपात भी हो सकता है। विभाग का कहना है कि चार अगस्त से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने वाला एक नया पश्चिमी विक्षोभ वर्षा की गतिविधियों को और तेज कर सकता है।
बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा का अनुमान है। वहीं मध्य भारत, कोंकण एवं गोवा, केरल तथा तटीय कर्नाटक में भी अगले कुछ दिनों तक मध्यम से भारी वर्षा जारी रहने की संभावना है।
मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र कमजोर पड़ गया है, लेकिन मानसून द्रोणिका अभी भी सक्रिय है। इसी कारण देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा का सिलसिला जारी है।
मुंबई में पूरे दिन रुक-रुक कर हल्की वर्षा होने की संभावना है। पालघर में मध्यम वर्षा तथा मुंबई और पड़ोसी ठाणे में हल्की से मध्यम वर्षा का अनुमान लगाया गया है। कोंकण क्षेत्र के अन्य जिलों में भी हल्की वर्षा जारी रह सकती है।
केरल में हाल की भारी वर्षा के कारण जनजीवन अभी भी प्रभावित है। वर्षा जनित घटनाओं में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। रा’यभर में 7,600 से अधिक लोगों को 27& राहत शिविरों में ठहराया गया है। हालांकि वर्षा की तीव्रता कुछ कम हुई है, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, सफाई और संक्रमण रोकने के लिए अभियान जारी है।
मौसम विभाग ने केरल के सभी 14 जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। मंगलवार और बुधवार को व्यापक भारी वर्षा की संभावना कम है, लेकिन सप्ताह के अंत में उत्तरी जिलों में फिर से भारी वर्षा हो सकती है।
असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढक़र 82 हो गई है, जबकि लगभग 78 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। लगातार वर्षा के कारण रा’य के कई हिस्सों में राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं।
भारी वर्षा के चलते गुजरात, सौराष्ट्र और क‘छ क्षेत्र में भी जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर बांध छलकने लगे हैं, जबकि अनेक इलाकों में जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा है कि अगस्त महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान है, जबकि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तथा दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ क्षेत्रों में दिन का तापमान सामान्य से कम रह सकता है।
विभाग के अनुसार अधिकांश क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहेगा, जिससे रात के समय गर्मी और उमस बनी रह सकती है।
मौसम विभाग ने बताया कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मध्यम स्तर की एल नीनो स्थिति बनी हुई है और मध्य एवं पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है। अनुमान है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के शेष मौसम के दौरान एल नीनो का प्रभाव और मजबूत हो सकता है।
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वर्ष एल नीनो का प्रभाव शुरुआती अनुमानों की तुलना में अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। इसके कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन कर पाया है। विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बार-बार बनने वाले निम्न दबाव के क्षेत्र, मजबूत मानसूनी परिसंचरण, हिंद महासागर के गर्म जल तथा मैडेन-जूलियन दोलन की अनुकूल स्थिति ने देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 का मानसून यह संकेत देता है कि अब केवल एल नीनो ही भारत में वर्षा की स्थिति निर्धारित नहीं करता। समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां तथा क्षेत्रीय मौसम प्रणालियां भी वर्षा की मात्रा और वितरण को प्रभावित करती हैं।
विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को और सशक्त बनाने तथा बाढ़ एवं सूखे जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने पर बल दिया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर लगातार नजर रखें। विशेष रूप से भारी वर्षा, बाढ़ और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।








