नई दिल्ली (आरएनएस)। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार, 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। हालांकि, मानसून की विदाई शुरू होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।
एक जून से 30 सितंबर के बीच देश में सामान्य रूप से 868.6 मिलीमीटर बारिश होती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष अब तक सामान्य के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज भी बदलने लगा है।
मानसून की विदाई के बीच पूर्वी भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर सक्रिय रहने की संभावना है। पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में आने वाले दिनों में बारिश जारी रह सकती है। मध्य भारत में भी छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और विदर्भ में मौसम की गतिविधियां बनी रहने का अनुमान है।
दक्षिण भारत में भी बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। क्षेत्र में कम दबाव की रेखा बनने के कारण तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में कई स्थानों पर बारिश हो सकती है।
पिछले दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में 105 मिलीमीटर, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के परभणी में 80 मिलीमीटर, गुजरात के द्वारका में 75 मिलीमीटर, गांधीनगर में 47 मिलीमीटर और ओडिशा के चांदबली में 29 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में अब बारिश की गतिविधियां कम होने लगी हैं। शुष्क पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से इन क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है।
इन हवाओं के सक्रिय होने से उत्तर भारत में दिन और रात के तापमान के बीच अंतर बढ़ रहा है। इसके चलते दिन के समय गर्मी महसूस हो रही है, जबकि रातें अपेक्षाकृत ठंडी होने लगी हैं। वहीं, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में उमस के साथ बारिश का मौसम बने रहने का अनुमान है।
इस बीच बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक नया कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो रहा है। इसके अगले कुछ दिनों में ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों की ओर बढऩे की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मौसम प्रणाली आगे चलकर अवदाब या चक्रवाती तूफान का रूप ले सकती है।
संभावित चक्रवाती गतिविधि और समुद्र में खराब मौसम को देखते हुए अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के साथ-साथ तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अगले तीन से चार दिनों तक समुद्र से दूर रहने तथा जलक्रीड़ा और समुद्र से जुड़ी अन्य गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है।
मानसून की वापसी के साथ जहां उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम धीरे-धीरे शुष्क होने लगेगा, वहीं पूर्वी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कुछ समय तक जारी रहने की संभावना है।
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