-दिल्ली के बाद रांची में भी छात्रों के आंदोलन को सीजेपी का समर्थन, परीक्षा निरस्त करने और केंद्रीय जांच की मांग
रांची (आरएनएस)। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा में कथित अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और प्रशासनिक लापरवाही के विरोध में रा’यभर के छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले पांच दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरने के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने रविवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। इस आंदोलन को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी अपना समर्थन दिया है।
विवाद की शुरुआत 2 जुलाई को घोषित 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों से हुई। परिणामों में कथित गड़बडिय़ों का आरोप लगाते हुए छात्रों ने 5 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन प्रारंभ किया था। इसके बाद 20 जुलाई को छात्र प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज और प्रमाण सौंपे थे। सरकार द्वारा प्रारंभिक स्तर पर कुछ कदम उठाए गए, लेकिन छात्रों का आरोप है कि वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई के बजाय केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।
आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें—
* 19 अप्रैल को आयोजित 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को तत्काल निरस्त किया जाए।
* जेपीएससी तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित घोटालों और प्रश्नपत्र लीक की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए।
* परीक्षा संचालन से जुड़ी विवादित संस्था टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) द्वारा आयोजित सभी पूर्व एवं वर्तमान परीक्षाओं की व्यापक जांच कराई जाए।
* भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर-पत्रक (ओएमआर) में पाँचवाँ विकल्प प्रयास नहीं किया गया अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए, ताकि खाली छोड़े गए उत्तर-पत्रों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो।
* परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई की जाए।
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि कई सप्ताह से शांतिपूर्ण आंदोलन चलाने के बावजूद सरकार और आयोग छात्रों की चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं कर सके हैं। उनका कहना है कि सरकार का रवैया छात्रों का मनोबल कमजोर कर रहा है।
उन्होंने कहा, छात्रों का हौसला बनाए रखने और आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए मैंने आज से भोजन का त्याग किया है। हमारा पहला उद्देश्य 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को निरस्त कराना तथा टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।
महतो ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री को सौंपी गई सभी मांगें पूरी होने तक उनका आमरण अनशन और छात्रों का धरना जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा घोटालों और प्रश्नपत्र लीक के दोषियों को कठोर दंड दिलाने तक आंदोलन नहीं रुकेगा।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बाद चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी झारखंड के आंदोलनरत छात्रों का समर्थन किया है।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्होंने झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत की है और उनकी सभी मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि सीजेपी रा’य के छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है।
सीजेपी के समर्थन के बाद रा’य सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढऩे की चर्चा तेज हो गई है।
छात्र आंदोलन के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी रा’य सरकार पर हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश महासचिव अमर कुमार बाउरी ने आरोप लगाया कि रा’य में लगभग हर भर्ती परीक्षा किसी न किसी विवाद या प्रश्नपत्र लीक की घटना से प्रभावित रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस कथित प्रशासनिक विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।
छात्रों के आंदोलन को विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों का समर्थन मिलने से झारखंड की राजनीति भी गरमा गई है। अब सरकार की आगामी कार्रवाई पर छात्रों, अभ्यर्थियों और विपक्षी दलों की नजरें टिकी हुई हैं।








