नई दिल्ली (आरएनएस)। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके इन दिनों अपनी उ‘च शिक्षा, पार्टी के आर्थिक संसाधनों और हाल के छात्र आंदोलनों में मिली सहायता को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में एक सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता द्वारा उनकी पारिवारिक आय और विदेश में हुई शिक्षा के खर्च पर सवाल उठाए जाने के बाद दिपके ने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा।
दिपके ने स्पष्ट किया कि उनकी उ‘च शिक्षा का अधिकांश खर्च बोस्टन विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई छात्रवृत्ति से पूरा हुआ। उन्होंने छात्रवृत्ति से संबंधित दस्तावेज भी सार्वजनिक करते हुए कहा कि शेष राशि के लिए उन्होंने शिक्षा ऋण लिया था, जिसका भुगतान उन्हें अभी करना है।
उन्होंने कहा, मेरी पढ़ाई का खर्च बोस्टन विश्वविद्यालय की छात्रवृत्ति से पूरा हुआ। इसके अतिरिक्त मैंने शिक्षा ऋण भी लिया था, जिसे अब मुझे चुकाना है।
पार्टी की आर्थिक व्यवस्था को लेकर दिपके ने कहा कि भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी का संचालन आम नागरिकों के आर्थिक सहयोग से किया जाएगा।
उन्होंने कहा, पार्टी चलाने के लिए मैं आम जनता से सहयोग राशि मांगूंगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी। प्रत्येक सहयोग और व्यय का सार्वजनिक विवरण रखा जाएगा।
एक अगस्त को सूरत निवासी सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अमित तिवारी ने विभिन्न सरकारी विभागों में शिकायत दर्ज कर दिपके के परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच कराने की मांग की थी।
तिवारी का कहना था कि दिपके के पिता महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) में कनिष्ठ अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि लगभग 60 से 65 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाला सरकारी कर्मचारी अपने ब‘चों को उ‘च शिक्षा के लिए अमेरिका कैसे भेज सकता है।
इस पूरे विवाद पर कॉकरोच जनता पार्टी की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने आरटीआई कार्यकर्ता पर निजी व्यक्ति को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा के खर्चों की जांच की जा रही है तो लोगों को प्रधानमंत्री केयर्स निधि (पीएम केयर्स फंड) की पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठाने चाहिए। गौर ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि इस विषय पर सवाल पूछने वालों को प्रधानमंत्री केयर्स निधि की भी जांच करनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी के दौरान स्थापित प्रधानमंत्री केयर्स निधि को सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे से बाहर रखे जाने को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक बहस होती रही है।
अभिजीत दिपके ने हालिया छात्र आंदोलन को लेकर एक और दावा किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मियों ने निजी स्तर पर आंदोलन के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए सहायता की पेशकश की थी।
दिपके के अनुसार, कुछ पुलिसकर्मी उनके पास आए और उन्होंने पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध करते हुए प्रदर्शनकारियों के लिए पानी की बोतलें उपलब्ध कराने की इ‘छा जताई। दिपके ने दावा किया कि उन कर्मियों ने बताया कि उनके परिवार के कुछ सदस्य भी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए वे छात्रों की भावनाओं को समझते हैं और मानवीय आधार पर सहायता करना चाहते थे।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
दिपके की शिक्षा, पार्टी की वित्तीय व्यवस्था और आंदोलन को मिले कथित समर्थन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जहां समर्थक इसे पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं, वहीं आलोचक इन दावों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।








