नई दिल्ली,(आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतों के गठन का सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि 2023 की हिंसा से संबंधित मामलों की प्रतिदिन सुनवाई होनी चाहिए, ताकि पीडि़तों को जल्द न्याय मिल सके। इसके साथ ही अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और विशेष जांच दल (एसआईटी) को लंबित मामलों की जांच में तेजी लाने तथा सभी मामलों की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर चिंता जताई कि कई पीडि़त परिवारों को अब तक उनके मामलों में दायर आरोपपत्रों की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि कानूनी सहायता वकील के संपर्क करने के एक सप्ताह के भीतर पीडि़तों और उनके अधिवक्ताओं को आरोपपत्र की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से उन मामलों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा है, जिनमें जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
साथ ही अदालत ने लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
हिंसा में 200 से अधिक लोगों की गई थी जान
मणिपुर में 3 मई 2023 को मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में कुकी-जो समुदाय द्वारा निकाले गए मार्च के बाद व्यापक हिंसा भडक़ गई थी। कई महीनों तक चले इस संघर्ष में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई, सैकड़ों घायल हुए और हजारों लोगों को अपना घर छोडऩा पड़ा।
सीबीआई और एसआईटी कर रही हैं जांच
अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार, सीबीआई अब तक 21 मामलों में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जबकि 11 मामलों की जांच अभी जारी है। दूसरी ओर, राज्य की विशेष जांच टीम (एसआईटी) आठ जिलों में दर्ज 3,020 मामलों की जांच कर रही है। इनमें से 301 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं और 10 मामलों में न्यायालय में सुनवाई शुरू हो चुकी है।
लापता लोगों के मामलों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हाईकोर्ट को हिंसा के दौरान लापता हुए 30 लोगों से जुड़े मामलों पर विशेष प्राथमिकता के साथ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। साथ ही सीबीआई, एसआईटी और अदालत द्वारा नियुक्त निगरानी समिति को सभी मामलों की नवीनतम स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया है।
राज्य में तनाव अब भी बरकरार
हालांकि हिंसा की तीव्रता पहले की तुलना में कम हुई है, लेकिन मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच तनाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हाल ही में इंफाल पश्चिम जिले के कांतो सबाल गांव में उपद्रवियों ने मैतेई समुदाय के कई खाली मकानों में आग लगा दी। घटना के बाद लगभग 600 लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, हालांकि सुरक्षा बलों ने समय रहते हालात पर नियंत्रण पा लिया। पुलिस ने आगजनी और हिंसा के मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई में तेजी आएगी तथा लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीडि़तों को राहत मिल सकेगी।








