अहमदाबाद(आरएनएस)। पिछले साल 12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया की फ्लाइट ्रढ्ढ-171 के भीषण हादसे की जांच में एक बेहद अहम अपडेट सामने आया है। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में 260 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि केवल एक यात्री विश्वासकुमार रमेश ही किसी तरह जिंदा बच सके थे। इस अभागे विमान में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश नागरिक और 10 केबिन क्रू के सदस्य मौजूद थे। अब इस मामले में अमेरिकी एविएशन कंपनी जीई एयरोस्पेस ने विमान के इंजनों की अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट भारत को सौंप दी है। सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद अब एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (्र्रढ्ढक्च) इन तथ्यों का गहन विश्लेषण कर रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो महीनों के भीतर इस खौफनाक हादसे की अंतिम और फाइनल रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी।
कॉकपिट में क्या हुआ था? फ्यूल कटऑफ का गहराता रहस्य
इस हादसे की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि उड़ान के दौरान इंजनों में अचानक फ्यूल (ईंधन) जाना बंद हो गया था। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, इंजन-1 और इंजन-2 के फ्यूल कटऑफ स्विच महज एक-एक सेकंड के अंतराल में अचानक ‘रन’ से ‘कटऑफ’ स्थिति में चले गए थे। इसी के बाद विमान ने तेजी से अपनी ऊंचाई खोनी शुरू कर दी और क्रैश हो गया। इस मामले में सबसे बड़ा रहस्य कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग (ष्टङ्कक्र) से जुड़ा है। रिकॉर्डिंग में साफ सुनाई देता है कि एक पायलट दूसरे से पूछता है कि उसने फ्यूल कटऑफ क्यों किया? इसके जवाब में दूसरा पायलट कहता है कि उसने ऐसा बिल्कुल नहीं किया है। इस बातचीत ने जांचकर्ताओं को भी उलझा दिया था कि अगर पायलटों ने फ्यूल बंद नहीं किया, तो इंजनों तक ईंधन कैसे और क्यों रुक गया।
मृत पायलटों पर दोष मढऩा आसान, लेकिन ठोस आधार जरूरी
अमेरिका से इंजनों की फाइनल जांच रिपोर्ट आने के बाद अब सभी की निगाहें एएआईबी की जांच पर टिकी हैं कि क्या एजेंसी इस हादसे की कोई ठोस और असली वजह खोज पाती है या नहीं। दशकों से हवाई दुर्घटनाओं की जांच कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि यह तो साफ है कि फ्यूल सप्लाई कटने से इंजन बंद हुए, लेकिन यह क्यों हुआ, इसका सटीक जवाब ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती है। जांचकर्ताओं का स्पष्ट तौर पर मानना है कि किसी ऐसे मृत पायलट पर हादसे का दोष मढ़ देना बहुत आसान होता है जो अपना बचाव करने के लिए अब इस दुनिया में नहीं है। ऐसे में एएआईबी को किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले सभी संभावनाओं को परखना होगा। अंतिम रिपोर्ट में जो भी निष्कर्ष दिए जाएं, उनका आधार तकनीकी रूप से पूरी तरह से मजबूत और पारदर्शी होना चाहिए।








