सुप्रीम कोर्ट का सीबीएसई की 3-भाषा नीति के कार्यान्वयन के खिलाफ याचिका पर अंतरिम आदेश देने से इनकार

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नई दिल्ली(आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की उस पॉलिसी को लागू करने को चुनौती देने वाली याचिका पर कोई अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया, जिसमें 2026-27 एकेडमिक सेशन से क्लास 9 के स्टूडेंट्स के लिए दो भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाओं की पढ़ाई जरूरी की गई थी.सीबीएसई के हाल ही में जारी एक सर्कुलर के अनुसार, 1 जुलाई से क्लास 9 के स्टूडेंट्स के लिए कम से कम दो देसी भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाएं पढऩा जरूरी कर दिया गया है. इस मामले की सुनवाई आज चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने की. पीठ ने एनजीओ फ्रेंड्स ऑफ पीपल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी की तरफ से दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. पीठ ने इस याचिका को इस मुद्दे पर लंबित दूसरी याचिकाओं के साथ टैग कर दिया।
पीठ ने कहा, हम आज एक लाइन का आदेश पास नहीं कर सकते. इस मामले पर लंबी बहस हुई. अंतरिम संरक्षण का कोई सवाल ही नहीं है. पीठ ने एनजीओ के नाम, फ्रेंड्स ऑफ पीपल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी पर भी सवाल उठाया और हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा कि क्या इस नाम का मकसद कोर्ट या लोगों के मन में डर पैदा करना है.वकील ने जवाब दिया, नहीं, माय लॉर्ड. यह ट्रस्ट का नाम है. यह 2013 में बना एक पुराना ट्रस्ट है. वकील ने कहा कि सीबीएई को 15 जून तक विस्तृत गाइडलाइंस जारी करनी थीं. दलीलें सुनने के बाद, पीठ ने मामले को दूसरी पेंडिंग याचिका के साथ 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट तीन भाषाओं की पढ़ाई को जरूरी बनाने वाली सीबीएसई पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने के लिए तैयार हो गया था. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया और दो हफ्ते में पूरा जवाब मांगा.
सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वे इस फैसले को लागू करने के लिए सीबीएई की परिवहन तैयारियों पर एक रिपोर्ट जमा करें और मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में तय की.

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