भोपाल (निप्र)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त एवं उन्नत बनाया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ ही उनकी सतत एवं सशक्त निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे आमजन को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार द्वारा आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। इन प्रयासों से प्रदेश में नवजात एवं मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में सतत सुधार दर्ज किया जा रहा है।
नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों का सशक्त संचालन
राज्य में जन्म के समय कम वजन वाले, समय पूर्व जन्मे एवं जन्म के समय गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार और नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयाँ (एसएनसीयू) प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इन इकाइयों से नवजात शिशुओं को विशेषज्ञ उपचार, आधुनिक चिकित्सा उपकरण एवं प्रशिक्षित चिकित्सकीय देखरेख उपलब्ध कराई जा रही है।
उपचार एवं डिस्चार्ज दर में उल्लेखनीय वृद्धि
वर्ष 2024-25 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ 1 लाख 29 हजार 212 नवजात शिशुओं को उपचार प्रदान किया गया था, वहीं वर्ष 25-26 में यह संख्या बढक़र 1 लाख 34 हजार 410 तक पहुँच गई है। साथ ही नवजात शिशुओं की सफलतापूर्वक डिस्चार्ज दर भी अब तक के सर्वोत्तम स्तर 82.3 प्रतिशत पर पहुँच गई है। राज्य में संचालित 62 एसएनसीयू में इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक कुल 15 हजार 54 नवजात शिशुओं को उपचारित किया गया, जिनमें से 12 हजार 818 नवजात शिशुओं को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया। एसएनसीयू में 85.2 प्रतिशत डिस्चार्ज दर राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है। इसके साथ ही लामा दर मात्र 2.12 प्रतिशत, रेफरल दर 4.2 प्रतिशत एवं मृत्यु दर 8.29 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। यह उपलब्धि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण नवजात चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी उपचार प्रबंधन को दर्शाती है।
बिस्तरों की संख्या में वृद्धि से उपचार क्षमता बढ़ी
राज्य शासन द्वारा नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों में उपलब्ध बिस्तरों की संख्या में भी वृद्धि की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ कुल 1654 बिस्तर उपलब्ध थे, वह अब बढक़र 1770 हो गए हैं। इससे अधिक संख्या में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
आधुनिक उपकरणों एवं विशेषज्ञ उपचार की उपलब्धता
राज्य सरकार गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये अत्याधुनिक एवं समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य की एसएनसीयू इकाइयों में जटिल एवं गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये वेंटिलेटर, सी-पैप, निर्बाध ऑक्सीजन, फोटोथेरेपी सहित आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही, फैसिलिटी बेस्ड न्यूबोर्न केयर (एफबीएनसी) में प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स द्वारा वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती नवजात शिशुओं को आवश्यकता अनुसार वेंटिलेटर सपोर्ट, सी-पैप, फोटोथेरेपी एवं ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध कराया जा रहा है तथा एंटीबायोटिक के तार्किक उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही सर्फ़ैक्टेंट एवं कैफीन साइट्रेट जैसी आधुनिक औषधियों के उपयोग से समय पूर्व जन्मे गंभीर नवजात शिशुओं का उपचार कर जीवन संरक्षित किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती लगभग 8 प्रतिशत नवजात शिशुओं को वेंटिलेटर सपोर्ट, 37 प्रतिशत को फोटोथेरेपी, 49 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक ऑक्सीजन तथा 47 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक एंटीबायोटिक उपचार प्रदान किया गया।








