नईदिल्ली, (आरएनएस)। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार नए विकल्प तलाश रहा है। इसी कदम के तहत केंद्र सरकार सबसे बड़े समुद्री तेल और गैस अन्वेषण अभियानों में से एक की तैयारी कर रही है। सरकार ने बंगाल की खाड़ी में हजारों किलोमीटर लंबे इलाके में समुद्र तल के नीचे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज करने के लिए सर्वे शुरू कराने का फैसला लिया है। रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों के हवाले से बताया गया है कि सरकार पूर्वी तट पर बंगाल-पूर्णिया, महानदी, कृष्णा-गोदावरी, कावेरी और अंडमान अपतटीय क्षेत्रों को कवर करते हुए एक बहु-बेसिन भूवैज्ञानिक सर्वे की तैयारी कर रही है। इस संबंध में 14 मई को निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। योजना के तहत, समुद्र तल का सर्वे किया जाएगा, ताकि उन स्थानों की पहचान की जा सके, जहां हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी हो सकती है।रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल-पूर्णिया और महानदी सर्वेक्षण में ही 45,000 किलोमीटर की रेखाएं शामिल होंगी। अंडमान बेसिन सर्वेक्षण में 43,000 किलोमीटर की रेखाएं, कृष्णा-गोदावरी में 43,000 किलोमीटर, जबकि कावेरी बेसिन में 30,000 किलोमीटर की रेखाएं जुड़ेंगी। कुल मिलाकर, ये सर्वेक्षण रेखाएं लगभग 1.60 लाख किलोमीटर के इलाके में फैली होंगी। सर्वे करीब 2 साल में पूरा होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि समुद्र के नीचे ऐसे ऊर्जा भंडार मौजूद हो सकते हैं जिनका दोहन नहीं हुआ है।दस्तावेजों के अनुसार, बंगाल बेसिन में 10 किलोमीटर से अधिक मोटाई की परतें हैं, जिनमें संभावित हाइड्रोकार्बन भंडार मौजूद हैं। महानदी बेसिन को अधिकारी व्यावसायिक उत्पादन क्षमता वाला बेसिन बताते हैं, जिसमें कई हाइड्रोकार्बन भंडार की मौजूदगी के संकेत हैं। अंडमान बेसिन सबसे अहम है, क्योंकि इसकी भूवैज्ञानिक संरचना म्यांमार और इंडोनेशिया के गैस उत्पादक क्षेत्रों से मिलती-जुलती है।
वहीं, कृष्णा-गोदावरी बेसिन पहले से ही महत्वपूर्ण गैस उत्पादक क्षेत्रों में से एक है।
दरअसल, भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ईरान युद्ध के चलते पैदा हुए हालात के बाद तेल की कीमतें बढ़ी हैं और भारत को अपनी निर्भरता के चलते काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक उपायों की ओर बढ़ रही है। यही वजह है कि घरेलू स्तर पर उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए सर्वे किया जा रहा है।








