पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से खाड़ी संकट के बीच पेट्रोल, डीजल और गैस का कम इस्तेमाल करने के साथ-साथ अगले 1 साल के लिए सोना नहीं खरीदने और ङ्खस्न॥ शुरू करने की अपील के बाद अखिलेश यादव केंद्र सरकार पर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने ङ्ग पर ट्वीट कर लिखा जैसे ही चुनाव खत्म हुए, ‘संकट’ की याद आ गई!असल में, देश के लिए सिफऱ् एक ही ‘संकट’ है, और उसका नाम है: ‘क्चछ्वक्क’।अगर इतनी सारी पाबंदियाँ लगानी ही थीं, तो फिर ‘पाँच ट्रिलियन डॉलर की जुमला अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? ऐसा लगता है कि क्चछ्वक्क सरकार के हाथों से लगाम पूरी तरह से फिसल चुकी है। डॉलर आसमान छू रहा है, और देश का रुपया पाताल की ओर गोता लगा रहा है। अखिलेश ने कहा सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, बल्कि अपने ही भ्रष्ट लोगों से की जानी चाहिए; क्योंकि जनता वैसे भी 1.5 लाख रुपए तोला सोना नहीं खरीद रही है। ये तो क्चछ्वक्क के वफ़ादार लोग हैं, जो अपने काले धन को सोने में बदलने में लगे हुए हैं। अगर हमारी बात गलत लग रही है, तो जऱा ‘लखनऊ से गोरखपुर’ या ‘अहमदाबाद से गुवाहाटी’ तक जाँच करके देख लीजिए। वैसे, ये सारी पाबंदियाँ चुनाव खत्म होने के बाद ही क्यों याद आईं? चुनाव के दौरान क्चछ्वक्क वालों ने जो हज़ारों चार्टर फ़्लाइट्स ली थीं, क्या वे पानी से उड़ रही थीं? क्या वे होटलों में नहीं रुक रहे थे, या सिलेंडरों की तस्वीरों के साथ खाना बना रहे थे? क्चछ्वक्क ने अपना चुनावी प्रचार सिफऱ् वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए ही क्यों नहीं किया? क्या ये सारी पाबंदियाँ सिफऱ् जनता के लिए हैं?
इस तरह की अपील से व्यापार, कारोबार और बाज़ारों में मंदी या महँगाई की आशंकाओं के चलते सिफऱ् डर, घबराहट, बेचैनी और निराशा ही फैलेगी। सरकार का काम अपने विशाल संसाधनों का समझदारी से इस्तेमाल करके हमें आपातकालीन स्थितियों से बाहर निकालना है, न कि डर या अफऱा-तफऱी फैलाना।
अगर वे सरकार नहीं चला सकते, तो क्चछ्वक्क वालों को बस अपनी नाकामी मान लेनी चाहिए—देश को बर्बाद न करें। वैसे भी, इन हालात की असली वजह क्चछ्वक्क सरकार का देश की पारंपरिक ‘गुटनिरपेक्ष’ विदेश नीति से भटक जाना है; वे कुछ खास वजहों और दबावों के चलते कुछ खास गुटों के पीछे भाग रहे हैं। देश की जनता इसकी कीमत महँगाई, बेरोजग़ारी, काम-धंधे की कमी और मंदी के रूप में चुका रही है। किसानों और मज़दूरों से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, दफ़्तर जाने वाला हर व्यक्ति, पेशेवर और कारोबारी—हर कोई इसकी चपेट में आ चुका है। सच तो यह है कि क्चछ्वक्क विदेश नीति और घरेलू नीति—दोनों ही मोर्चों पर नाकाम रही है। यह अपील क्चछ्वक्क सरकार की अपनी नाकामी का कबूलनामा है। असल में, जैसे ही वोट आए, क्चछ्वक्क की कमियां सामने आ गईं।
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा क्चछ्वक्क वालों ने चुनाव के समय घोटालों से राजनीति को दूषित कर दिया है; नफऱत फैलाकर उन्होंने सामाजिक सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने आचरण से उन्होंने संस्कृति और मूल्यों को कलंकित किया है; उन्होंने धर्म को भी नहीं बख्शा, संतों और ऋषियों पर हमले और आरोप लगाए—और अब वे अर्थव्यवस्था को लेकर रो रहे हैं। इस तरह, क्चछ्वक्क ने देश को हर क्षेत्र में—सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक—बर्बाद कर दिया है। इस अपील के बाद, जनता का जो गुस्सा अचानक भडक़ उठा है, उसे क्चछ्वक्क चुनाव के समय के किसी भी जुगाड़ से संभाल नहीं पाएगी; अब क्चछ्वक्क का खेल हमेशा के लिए खत्म हो चुका है।आज देश कह रहा है: हमें अब क्चछ्वक्क नहीं चाहिए!








