देश की प्रमुख व मप्र, गुजरात की जीवन रेखा मां रेवा का प्रदूषण नहीं हो रहा कम

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 111 सहायक नदियों वाली नर्मदा जी की स्वच्छता के लिए तेज अभियान की जरूरत
बलराम शर्मा
नर्मदापुरम। देश की प्रसिद्ध मप्र और गुजरात की जीवन रेखा मां नर्मदा की जलधारा पर संकट मंडरा रहा है। मां नर्मदा का जल संग्रहण हरित क्षेत्र तीव्रता से कम हो रहा है। तटीय क्षेत्र में दिन रात अंधाधुंध दोहन, शोषण, अतिक्रमण, निर्माण, खनन से नर्मदा जी के जीवन पर संकट बनता जा रहा है। कुछ लोग नासमझी के कारण तथा कुछ लोग जानते समझते हुए भी दोहन करते जा रहे हैंं। जिससे उत्तर और दक्षिण तट पर 111 सहायक नदियों वाली मां नर्मदा की जलधारा कमजोर होती जा रही है। नौबत तो यहां तक आ रही है कि कुछ क्षेत्रों में नर्मदा जी की जलधारा गुप्त सी होने लगी हैं। कई स्थान ऐसे हैं जहां पर 50 फीट तक गहराई रहती थी अब वहां भी कम पानी बचा है। नर्मदा जी के इस संकट को लेकर संत भैयाजी सरकार दादा गुरू भी काफी दिनों से सत्याग्रह कर रहे हैं। जन जागरण कर रहे हैं। मां नर्मदा का जल प्रदूषित भी हो रहा है। जिस पर रोक के लिए तेज अभियान की जरूत है।
बहुत कम होता जा रहा है जल
नर्मदा जी की अनेक बार परिक्रमा कर चुके मां नर्मदा के भक्त कवि खेमचंद यादवेश व पिछले दिनों ही श्री यादवेश के साथ परिक्रमा करने वाले कमलेश सक्सेना ने बताया कि अनेक स्थानों पर नर्मदा जी का जल बहुत कम होता जा रहा है। अनूपपुर जिला के पास कपिलधारा तीर्थ स्थान के पास से लेकर नीचे तक जंगल वाले हिस्से में तक नर्मदा जी अनेक स्थान पर विलुप्त सी हो गई हैं। उसके आगे पीछे के अनेक स्थान पर भी कम ही पानी बह रहा है। अब ऐसे दृश्य अनेक स्थानों पर बन रहे हैं जो देश के लिए गहरी चिंता का विषय होना चाहिए।
कट रहे हैं जंगल
वैसे तो नर्मदा जी का अनेक तरह से शोषण व दोहन हो रहा है। नर्मदा तट के अनेक क्षेत्रों में जंगल कट रहे या जल रहे हैं। तट पर खेती करने वाले अनेक लोग अपनी फसल कटने के बाद नरवाई में आग लगा देते हैं। जिससे जंगल तक में आग फैल जाती है। जिससे अनेक बड़े-बड़े पेड़ जलकर नष्ट हो जाते हैं। जिनसे भी जल का स्त्रोत कम हो जाता है।
खेमचंद यादवेश मां नर्मदा की अनेक बार परिक्रमा कर चुके हैं।
नर्मदा जी का संरक्षण अति आवश्यक है
आध्यात्मिक, आर्थिक व सांस्कृतिक महत्व की नदी मां नर्मदा सबका उद्धार करने वाली है। लाखों लोगों को जीवन देने वाली का जीवन संकट में है। उसके तट पर घने पेड़ की जरूरत है। लेकिन पेड़ कट रहे हैं। नर्मदा जी का संरक्षण होना चाहिए। इसके लिए विशेष अभियान चलाए जाने चाहिए। जो दिखावे के नहीं असलियत में होने चाहिए। कुछ लोग कर भी रहे हैं।
कमलेश सक्सेना, हाल ही में परिक्रमा की है
नर्मदा जी की हालत ठीक नहीं है
मैं परिक्रमा कर चुका हूं। अनेक स्थानों पर अनायास ही देखने में आता है कि कुछ क्षेत्रो में नर्मदा जी की बहुत पतली हो गई हो गई हैं। नर्मदा जी की हालत ठीक नहीं है। इसके लिए शासन के साथ जनभागीदारी भी बड़े पैमाने पर होना चाहिए। क्योंकि मां नर्मदा साक्षात देवी हैं। उनकी ऐसी हालत नहीं होनी चाहिए। अभी भी वक्त है लोगों को जागरूक होना चाहिए।
हीरालाल शर्मा मां नर्मदा परिक्रमावासी

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