चुनाव के बाद हिंसा रोकने के लिए सीएपीएफ को जारी रखने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का तुरंत सुनवाई से इनकार

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नई दिल्ली(आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में चुनाव खत्म होने के बाद भी चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सेंट्रल फोर्स की तैनाती जारी रखने की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से मना कर दिया.
यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने उल्लिखित किया गया. एक पार्टी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वी गिरी ने कहा कि 2021 में राज्य में चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर हुई हिंसा को ध्यान में रखते हुए सेंट्रल फोर्स को राज्य में रहने दिया जाना चाहिए.गिरि ने मौजूदा विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद ऐसी हिंसा को रोकने के उपाय करने की मांग की, जिनकी गिनती चल रही है.वरिष्ठ वकील ने कहा कि उनके क्लाइंट हिंसा रोकने के लिए जरूरी फोर्स की तैनाती की देखरेख के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाने का निर्देश चाहते हैं, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज करें.
बेंच ने गिरी को हाई कोर्ट जाने को कहा. गिरी ने कहा कि नतीजे आने के बाद चुनाव आयोग का रोल खत्म हो जाएगा. चुनाव आयोग की तरफ से वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने गिरी की बात से सहमति जताई. नायडू ने कहा, गिनती पूरी होने के बाद हमारा नियम खत्म हो जाता है.गिरी ने जोर देकर कहा कि पिछली बार के ट्रेंड को देखते हुए हिंसा की संभावना ज़्यादा है. हालांकि, बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाना चाहिए. बेंच ने कहा, राज्य की राजनीतिक कार्यपालिका फैसला करेगी।
सीजेआई ने कहा, हमें उम्मीद है कि वे समझेंगे कि कानून और व्यवस्था उनका विषय है. बेंच ने कहा कि गिरी के संगठन की तरफ से दायर की गई मुख्य याचिका 11 मई को लिस्टेड है. बेंच ने कहा कि वह तय तारीख पर मामले पर सुनवाई करेगी.

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