सीहोर। भारत को विश्व गुरु की नीव रखने में सबसे बड़ा योगदान भारत के एक युवा भगवा सन्यासी स्वामी विवेकानंद का रहा जिन्होंने भारत की सन्यास परंपरा भारत के गुरु तत्व और भारत के ज्ञान को अमेरिका धर्म संसद सन 1893 में भारत का भगवा प्रथम बार लहराया। मेरे प्यारे अमेरिका भाई एवं बहनों कहकर भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिलाया। आज वही सनातन की परंपरा संस्कृति संस्कार धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं उन्हीं का संरक्षण करना हर सनातनी का कर्तव्य है। उक्त उद्गार सीहोर मध्य प्रदेश की भूमि से छत्तीसगढ़ की पावन भूमि कुरूद झूरा नवागांव की पावन धरती पर स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन उपलक्ष में चल रही पांच दिवसीय श्रीराम एवं राष्ट्र कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास परम गौभक्त राष्ट्रीय संत पंडित मोहित राम जी पाठक सीहोर वालों ने व्यक्त किया। जिस प्रकार स्वामी जी ने सनातन धर्म भारत माता और राष्ट्र के उत्थान के लिए जातिवाद भेदभाव को मिटाने के लिए अपने हिंदू होने पर गर्व करने के लिए निरंतर अपने जीवन भर कार्य किया इस प्रकार हम सभी भारतवासी सनातनियों को हमारे बनवासी आदिवासी वंचित बांधुओ को साथ लेकर चलना होगा स्वामी विवेकानंद और भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलकर कार्य करना चाहिए। भगवान श्रीराम की कथा यही राष्ट्र की कथाएं हैं राम है तो राष्ट्र है हिंदू है तो भारत है हिंदू है तो हिंदुस्तान है। यही जय घोष स्वामी विवेकानंद के मुख पर रहा और उसी को चरितार्थ करने के लिए भारत के साधु संत सन्यासी राष्ट्र प्रेमी जन निरंतर अपने कार्य को कर रहे हैं राम के चरित्र को धारण करने वाले के जेब में राम का चित्र हो ना हो चरित्र जरूर होना चाहिए। घर में राम का चित्र हो ना हो रामचरितमानस की चौपाई आवश्यक होना चाहिए यही राम कथा को सार्थक करते हैं कथा के उपरांत मंगल में शिव पार्वती विवाह महोत्सव मनाया गया आज तृतीय दिवस की कथा में भाव रूप में श्री राम जन्म उत्सव मनाया जाएगा। आयोजन समिति ग्राम जुड़ा नवागांव कुरूद में संपूर्ण क्षेत्रवासियों से कथा में पधार का धर्म लाभ लेने का आग्रह किया जय सनातन जय भारत जय स्वामी विवेकानंद , संपूर्ण पंडाल में एक ही जयकारा गूंज रहा था नंद के आनंद की जय विवेकानंद की।







