-लैंड फॉर जॉब केस
नई दिल्ली (आरएनएस)। नौकरी के बदले ज़मीन सीबीआई केस में दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव और दूसरे आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश टाल दिया है. कोर्ट ने सीबीआई से आरोपियों का स्टेटस वेरिफाई करने को कहा है, क्योंकि कुछ आरोपियों की कार्रवाई के दौरान मौत हो गई थी. कोर्ट ने सीबीआई से स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने को कहा है और मामले की सुनवाई 8 दिसंबर को तय की है. सीबीआई ने 103 लोगों को आरोपी के तौर पर चार्जशीट किया था. हालांकि, कार्रवाई के दौरान 4 की मौत हो गई.दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर के मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के मामले पर फिर फैसला टाल दिया है। आरोप तय करने पर फैसला तैयार नहीं होने की वजह से टाल दिया गया. स्पेशल जज विशाल गोगने ने 8 दिसंबर को फैसला सुनाने का आदेश दिया, इसके पहले 10 नवंबर को भी कोर्ट फैसला टाल चुका है.
कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज सुनवाई के दौरान लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पेश नहीं हुए. तीनों की ओर से पेश वकील मनिंदर सिंह ने तीनों की आज कोर्ट में पेशी से छूट की मांग की जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया. बता दें कि लालू यादव ने इस मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक की मांग के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.
लालू यादव की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले में अभियोजन चलाने के लिए जरुरी अनुमति नहीं ली गई. ऐसे में पूरी जांच गैरकानूनी है. बिना जरुरी अनुमति के जांच शुरु नहीं की जा सकती है. सिब्बल ने कहा कि इस मामले में पूरी कार्यवाही ही गलत है. सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि लालू यादव की ओर से जानबूझकर ट्रायल कोर्ट में आरोप तय करने पर दलीलें नहीं रख रहे हैं. तब कोर्ट ने कहा कि जरुरी अनुमति की बात केवल भ्रष्टाचार निरोधक कानून के मामलों में होगी न कि भारतीय दंड संहिता से जुड़े मामलों में.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. 7 अक्टूबर 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव , राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था. ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. सीबीआई ने 7 जून 2024 को इस मामले में अंतिम चार्जशीट दाखिल की थी. जिसमें 78 लोगों को आरोपी बनाया गया है. इन 78 आरोपियों में से रेलवे में नौकरी पाने वाले 38 उम्मीदवार भी शामिल हैं.
साल 2004, यूपीए सरकार में रेलमंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने निजी लोगों से जमीन लेकर उन्हें रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी (2004-2009) दी गई. मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद उनके परिवार के कई सदस्यों समेत 100 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया. सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, मामले में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है. पश्चिम मध्य रेल जोन में नियुक्तियों के बदले जमीन के टुकड़े ट्रांसफर किए गए.
जमीन के बदले नौकरी घोटाले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव, तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती, हेमा यादव समेत अन्य आरोपी हैं. इसके अलावा 100 लोगों को इस मामले में अभियुक्त बनाया गया था, जिसमें 78 अभियुक्तों के खिलाफ फाइनल चार्जशीट दाखिल हो चुकी है.








