नर्मदातट पर उमड़ेंगे श्रद्धालु,10 दिवसीय होगा अनुष्ठान

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श्रीराम चरित्र मानस महायज्ञ और श्रीरामकथा 25 से

नर्मदापुरम। मां नर्मदा के दक्षिण तट के ग्राम खरखेड़ी टिगरिया में श्रीराम चरित्र मानस महायज्ञ और श्रीरामकथा का दस दिवसीय आयोजन निरंतर 20 वर्षों की तरह इस वर्ष भी किया जा रहा है। मां नर्मदा के अनन्य भक्त व समाजसेवी संत स्वामी श्रीब्रम्हानंद उदासीन महाराज की सद्प्रेरणा और मार्गदर्शन में यह धार्मिक अनुष्ठान होता रहा है। बीते 20 वर्षों तक उनके सानिध्य में ही पूरी गरिमा व भव्यता के साथ कार्यक्रम हुआ। उनके ब्रम्हलीन होने से वे सशरीर नहीं है उनके मार्गदर्शन, आशीर्वाद व उनके द्वारा बनाई गई परंपरा को कायम रखते हुए यह आयोजन वैसा ही किया जा रहा है। ग्रामवासियों व क्षेत्र के नागरिकों की मंशानुरूप इस वर्ष भी गांव की समितियों के द्वारा निर्णय लिया गया है कि महाराज श्री की परंपरा को कायम रखा जाएगा।

इस कार्यक्रम में पूरा गांव व आसपास तथा दूरदराज क्षेत्रों के श्रद्धालु भी तनमनधन से सहभागी बनते रहे हैं। कार्यक्रम की तैयारी जोर शोर से जारी है। बलराम शर्मा, सुदीप पटेल, ताराचंद गौर, विनय गौर व अन्य सदस्यों ने बताया कि नर्मदा तट के पटेघाट पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठान में पूरे क्षेत्र के दर्जनों गांवों के हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। यहां पर महायज्ञ का आयोजन पं हरिओम दुबे के आचार्यत्व में किया जाएगा। वहीं इस बार कथा व्यास के रूप में अनंतश्री विभूषित हनुमत द्वार पीठाधीश्वर जगदगुरू रामानंदाचार्य स्वामी श्री धीरेंद्राचार्य महाराज चित्रकूट धाम से पधार रहे हैं। श्रीरामकथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से सायं 4.30 बजे तक मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम के गुणानुवाद पर संगीतमय श्रीराम कथा का वाचन होगा।

नर्मदातट पर बनी यज्ञशाला में आहुतियां प्रतिदिन प्रात: 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक डाली जाएंगी। कथा व यज्ञ से पूर्व 25 नवंबर को अपरान्ह उपरांत नर्मदा तट पर कलश यात्रा निकाली जाएगी। दूसरे दिन 26 नवंबर से श्रीरामकथा व मानस महायज्ञ से शुरू होगा। श्रीरामकथा का विश्राम और महायज्ञ की पूर्णाहुति 4 दिसंबर को होगी। समापन अवसर पर भंडारे का आयोजन किया जाएगा। यज्ञ शाला और कथा मंच की तैयारी जारी है। ज्ञातव्य है कि मां नर्मदा के तट पर पटेघाट और यहां पर बने प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार करने में संत ब्रम्हानंद महाराज ने विशेष रूची लेकर जीर्णोद्धार करवाते हुए घाट की जर्जर हालत में काफी सुधार करवाया है। इस धार्मिक अनुष्ठान में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु शामिल होतेे हैं।

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