सीधे साधे लोगों पर दिखाते हैं दादागिरी, एजेंटों को किया जाए बस स्टेंड से बाहर
नर्मदापुरम। बसों के जंक्शन पर प्रतिदिन शताधिक बसों का आना जाना लगा रहता है। यहां पर प्रशासनिक अधिकारियों का दखल नहीं होने से इस संभाग के सबसे बड़े बस स्टेंड पर व्यवस्थाएं तो सुधर नहीं रही हैं। लेकिन यात्रियों के साथ ज्यातियां जरूर हो रही हैं। यहां सबसे अधिक यदि किसी का रूतवा है तो वह है बसों के एजेंटों का ये एजेंट अपनी बपौती मानकर बस स्टेंड पर दादागिरी दिखाते हैं। प्रशासन को यहां पर चुपचाप यह देखना चाहिए कि बसों के एजेंट यात्रियों के साथ किस तरह का व्यवहार करते हैं। साथ ही अनेक एजेंट दिन में ही शराब पीकर गाली गुप्तार करते रहते हैं। खासकर सीधे सच्चे लोगों पर रौब दिखाते हैं। यात्रियों से बततमीजी इनका अधिकार हो गया है। ऐसे एजेंटों की खोज कर इन्हें बस स्टेंड से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए। लेकिन प्रशासन को यात्रियों की तकलीफ से कोई लेना देना नहीं है। इसलिए एजेंटों की मनमानी पर लगाम कसना मुश्किल है। जबकि यह बहुत जरूरी हो गया है। एजेंटों की गुंडागर्दी चरम पर है। बस स्टेंड पर बिना एजेंट के भी काम चल सकता है। सिर्फ ड्रायवर और कंडेक्टरों से ही बसों का संचालन किया जाना चाहिए। आकस्मिक निरीक्षण करते हुए जो बिना काम के एजेंट हैं उन्हें एक अभियान चलाकर बाहर किया जाना चाहिए साथ ही बस स्टेंड पर जो अनावश्यक लोग सामग्री बेंचते हैं उन पर भी निगाह रखना आवश्यक है क्योंकि उनके चक्कर में अनेक अवैधानिक रूप से व्यवसाय करने वालों का अर्थात असामाजिक तत्वों का अड्डा बस स्टेंड बन गया है। इनसे मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन स्तर से एक अभियान चलाया जाना बहुत आवश्यक है।
बस मालिक भी ध्यान दें
बस मालिक से ये एजेंट सवारी में बिठाने के नाम पर कमीशन लेते हैंं। बस में जल्दी से सवारी मिल जाए बस जल्दी रवाना हो जाए। इसलिए बस मालिक इन तथाकथित एजेंटों को कमीशन देते हैं। लेकिन इन एजेंटों को यह समझाइश नहीं देते कि बस यात्रियों से सीधे से पेश आएं। कई बार तो सवारी का हाथ पकड़कर जबरजस्ती बस में बिठाने की कोशिश करते हैं। यदि सवारी कुछ कहे तो लड़ने को तैयार हो जाते हैं।
बस स्टेंड पर अव्यवस्थाओं का आलम
क्षेत्र के सबसे बड़े स्टेंड पर व्यवस्थाएं लड़खड़ा रही हैं। नगर पालिका को बस स्टेंड से सीधी कमाई है। लेकिन यहां पर नगर पालिका का भी ध्यान नहीं है। सिर्फ फर्श ठीक करने के नाम पर ही प्रति बस से वसूली की जाती है। साफ सफाई का अभाव हमेंशा रहता है। खानापूर्ति की जाती है। नालियों की साफ सफाई कई वर्षों से नहीं हुई। बैठक व्यवस्था ठीक नहीं है। लोगों को पेड़ की छाया में समय गुजारना पड़ता है। प्रतीक्षालय क्षतिग्रस्त हो चुका है। उसे सुधारने के लिए किसी का ध्यान नहीं है। नपा ने बस स्टेंड पर अतिक्रमण कर रेन बसेरा बना दिया है। उसमें भी पहले जैसी व्यवस्थाएं नहीं रह गई हैं। पीने के पानी के लिए भी लोगों को परेशान होना पड़त है।






