भारत की बढ़ेगी ताकत अमेरिका ने दी हाईटैक मिसाइल जैवलिन की मंजूरी

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नई दिल्ली,(ए)। अमेरिका ने भारत के दो महत्वपूर्ण रक्षा सौदों को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इनमें 155 मिमी जीपीएस-गाइडेड एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल और विश्व प्रसिद्ध पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम जैवलिन शामिल हैं। कुल 92.8 मिलियन डॉलर (लगभग 775 करोड़ रुपये) के इन सौदों से भारत-अमेरिका रणनीतिक रक्षा साझेदारी को नया बल मिलेगा। इससे भारतीय सेना और अधिक ताकतवर होगी।्रअमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (डीएससीए) ने बताया कि एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल और संबंधित उपकरणों का सौदा 47.1 मिलियन डॉलर तथा जैवलिन कमांड लॉन्च यूनिट, मिसाइलें और सहायक उपकरणों का सौदा 45.7 मिलियन डॉलर का है। डीएससीए के बयान में कहा गया है कि ये बिक्री अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को मजबूत करेगी तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक प्रमुख रक्षा साझेदार के रूप में भारत की सैन्य क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।
भारत ने 216 यूनिट एम982ए1 एक्सकैलिबर टैक्टिकल प्रोजेक्टाइल की खरीद का अनुरोध किया था। रेटियॉन (अब आरटीएक्स कॉर्पोरेशन) द्वारा निर्मित यह 155 मिमी स्मार्ट गोला जीपीएस और इनर्शियल नेविगेशन से लैस है। सामान्य तोपों से दागे जाने पर यह 40-50 किमी तक 10 मीटर से कम त्रुटि (सीईपी) के साथ लक्ष्य भेदता है। भारतीय सेना ने 2019-20 में पहली खेप खरीदकर इसे एम777 अल्ट्रालाइट हॉवित्जर के साथ लद्दाख और अरुणाचल में तैनात किया था। नई खेप से हाई एल्टीट्यूड क्षेत्रों में सटीक लंबी दूरी की मारक क्षमता और बढ़ेगी।
लॉकहीड मार्टिन और आरटीएक्स द्वारा संयुक्त रूप से विकसित जैवलिन दुनिया की सबसे उन्नत फायर एंड फॉरगेट पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। टॉप-अटैक क्षमता के साथ यह आधुनिक टैंकों के रिएक्टिव आर्मर को भी भेद सकती है। यूक्रेन युद्ध में इसने रूसी टी-90 और टी-14 आर्मटा टैंकों को बड़े पैमाने पर नष्ट कर अपनी प्रभावशीलता सिद्ध की है। भारतीय सेना 2010 से ही इसे सीमित संख्या में हाई एल्टीट्यूड और मैदानी दोनों क्षेत्रों में उपयोग कर रही है। नई खरीद से पैदल सैनिकों की टैंक-विरोधी क्षमता में गुणात्मक सुधार होगा। अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि इन हथियार प्रणालियों को भारतीय सेना में एकीकरण करने में कोई तकनीकी कठिनाई नहीं आएगी। दोनों सौदे मिलकर भारत की आर्टिलरी और एंटी-आर्मर युद्ध क्षमता को नया आयाम देंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सकैलिबर लंबी दूरी की सटीक मार जबकि जैवलिन निकट एवं मध्यम दूरी की घातकता प्रदान करेगी, जिससे सीमा पर किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ मजबूत निरोधक क्षमता तैयार होगी। ये मंजूरियां भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के लगातार मजबूत होते संबंधों का नवीनतम प्रमाण हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच और बड़े रक्षा सौदों की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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