नवरात्र महोत्सव के समापन अवसर पर समिति सदस्यों ने सामूहिक रूप से छोड़ी आहुतियां

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– पंडालों में गूंजते रहे सप्तशती के श्लोक विधि विधान से बनाया हवन कुंड

नर्मदापुरम। निप्र। नवरात्र के दस दिनों तक देवी भक्ती में श्रद्धालु तल्लीन रहे। नवमी के दिन सुबह से ही हवन पूजन और कन्या भोज के साथ भंडारे के आयोजन किए गए। देवी पंडालों के सामने नवरात्र महोत्सव समितियों के द्वारा हवन कुंड बनाकर पंडित के द्वारा किए जा रहे वेद मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां छोड़ी गई। शहर में सुबह से ही हवन पूजन का क्रम जारी हो गया था। जिसके चलते विभिन्न स्थानों पर समितियों के द्वारा पूजन अर्चन के बाद सामूहिक रूप से हवन किया जा रहा था। अनेक पंडालों में सुबह के समय ही हवन करन शुरू कर दिया था। पूरे नो दिनों तक समूचे शहर में देवी मय वातावरण बना रहा है। हर तरफ देवी के जयकारे गूंजते रहे।

स्थापना स्थलों पर हुए देवी पाठ

नवरात्र महोत्सव के दौरान देवी स्थापना स्थल पर, घट स्थापना स्थल पर और जवारे रखे हुए स्थानों पर पंडित के द्वारा दुर्गा शप्त्तसती का पाठ किया गया। वहीं समापन अवसर पर इस पाठ के श्लोकों के माध्यम से आहुतियां छोडी गई। माता रानी के जयकारे लगाए जाते रहे। इस मौके पर अनेक स्थानों पर अनेक आयोजन होते रहे।

जगह जगह हुए देवी जस के आयोजन

मां भगवती की आराधना के विशेष पर्व नवरात्र उत्सव में अनेक स्थानों पर देवी जस, रात्रि जागरण और छप्पन भोग जैसे आयोजन होते रहे। समितियों के द्वारा भजन कीर्तन किए गए। जिसमें महिलाओं की समितियों के द्वारा दिन रात भजन किए जाते रहे। पूरे नो दिनों तक बच्चों और महिलाओं में विशेष उत्साह बना हुआ था।

कन्या भोज और भंडारे भी हुए

कई श्रद्धालुओं के द्वारा नो दिनों तक समिति के कई सदस्यों ने पूरे नो दिनों तक उपवास रखा। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं के द्वारा पंडालों में कन्या भोज के आयोजन भी किए गए। अनेक स्थानों पर भंडारे के आयोजन भी हुए। उत्सव समिति के सदस्यों ने भी भंडारे कराये।

जयकारे के साथ निकले जवारे

शहर में अनेक स्थानों पर नो दिनों तक जवारे रखे जाने के साथ वहां पर देवी जस और कीर्तन के बाद नवमी के अवसर पर पूजन पाठ के बाद जवारों का विसर्जन नर्मदा जी में किया गया। महिलाओं के द्वारा गाजे बाजे के साथ जवारों को नर्मदा जी के तट पर ले जाकर विसर्जित किए गए। जवारों के साथ माेहल्लों के श्रद्धालु भी शामिल रहे।

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