आगामी आन लाइन तीन अक्टूबर से महाराष्ट्र में

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 भक्ति रूपी बीज ही धर्म की उपज देता-अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा
सीहोर। भक्ति रूपी बीज ही धर्म की उपज देता है इसका अर्थ है कि भक्ति ही वास्तविक धर्म का मूल स्रोत है और भक्ति से ही धर्म का विकास और फल प्राप्त होता है। जैसे एक बीज को पानी देने पर वह पेड़ बनकर फल देता है, उसी प्रकार हृदय में बोया गया भक्ति का बीज भगवान के पवित्र नाम और लीलाओं के श्रवण व कीर्तन से पोषित होकर भक्ति की लता को बढ़ाता है, जो अंतत: आध्यात्मिक आनंद रूपी फल प्रदान करती है। हर परिस्थिति में ईश्वर में अटूट विश्वास बनाए रखें, यह भक्ति का सबसे बड़ा लक्षण है। उक्त विचार जिला मुख्यालय के समीपस्थ कुबेरेश्वरधाम पर जारी आन लाइन शिव महापुराण के पांचवे दिवस अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कही। अब आगामी आगामी कथा तीन अक्टूबर से महाराष्ट्र जलगांव में आयोजित होगी।
उन्होंने युवाओं से कहाकि अपनी संगति में सुधार करें, गलत संगत में पढ़कर अपना जीवन बर्बाद नहीं करें। आप संगति का महत्व तो जानते ही होंगे हमारे जीवन में संगति एक अहम रोल अदा करती है। ये संगति का ही असर होता है की अच्छे लोग बुरे लोगो की संगत में बुरे आदत पाल लेते है तो वही कई बुरे आदत वाले लोग भले लोगो के संगत में रहकर खुद को बिल्कुल बदल देते है तो यह संगति का ही नतीजा होता है। रविवार को उन्होंने एक युवा का पत्र पढ़कर बताया कि 20 वर्षीय एक युवक है जो जिला बालाघाट में निवासरत है उनको तीन साल पहले बुरी आदत के कारण बीमारी हो गई थी, जिसके कारण उनकी पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था और बीमारी का इलाज भी नहीं हो रहा था, उन्होंने अपनी चाची को इस संबंध में बताया तो उन्होंने भगवान शिव की भक्ति के लिए उसको प्रेरित किया। उसके उपरांत जब युवक के अंदर भक्ति के प्रति भरोसा आया तो पढ़ाई में मन लगने के साथ ही बीमारी ठीक हो गई। यह भक्ति की शक्ति का परिणाम है।
पंडित मिश्रा ने कथा के दौरान सभी से आह्वान करते हुए कहा कि जिस प्रकार बीज अंकुरित होता है उसी प्रकार बच्चों को कम उम्र में ही सनातन संस्कृति और धर्म के प्रति जागरुक करें। बच्चें बीच के समान है। जिस प्रकार बीज अंकुरित होगा वही पेड़ बनेगा। ऐसे में ज्ञान और सनातन संस्कृति की शिक्षा बच्चों को देने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को संगति पर जोर दिया। जिस संगति में हम रहेंगे और जो मनोभाव होगा उसका हम पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने लोगों से कहा कि प्रतिदिन शिव मंदिर जाए और भगवान को जल चढ़ाए। भक्ति से ही व्यसन मुक्ति संभव है। कथा श्रवण करने जाए तो अपना अभिमान त्याग कर जाएं। पंडित मिश्रा ने कहा कि सैनिक सीमा की रक्षा करते हैं इसी प्रकार कथाकार सनातन धर्म की सभ्यता की संस्कृति की रक्षा करते हैं। कथा चाहे कोई भी हो चाहे वह श्रीमद्भागवत हो, राम कथा हो या शिव महापुराण सभी कथा हमें संस्कृति से जोड़ती है।

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