नर्मदापुरम। नर्मदा तट पर जारी रामलीला में दर्शाया गया कि राजा दशरथ के स्वर्गवास होने के उपरांत अयोध्या में राजसमाज की बैठक होती है जहां ब्रह्मऋषि वशिष्ठजी और श्रीभरत और श्रीशत्रुघ्न के साथ ससमाज पुरवासी गण श्रीरामजी से भेंट करने वन की ओर प्रस्थान करतें हैं । वन में उनकी भेंट निषादराज से होती है ए भरतजी को निषाद उन सभी पवित्र स्थलों का दर्शन करातें जहां श्रीराम जी ने विश्राम किया था पश्चात निषाद एभरत जी को उस स्थान पर ले जातें है जहाँ पर श्रीराम जी जानकीजी और लक्ष्मण जी रह रहे होते हैं ।
श्रीभरत और श्रीराम का मिलन होता है वन में ही वशिष्ठ जी के मार्गदर्शन में राजसमाज की बैठक होती है जिसमें श्रीराम जी के कहते हैं कि वे पिताजी के वचनानुसार 14 वर्ष वनवास व्यतीत करने के उपरांत ही अयोध्या आवेंगे भरतजी श्रीरामराज्याभिषेक के लिए लाए गए पवित्र नदियों के जल को अत्रिमुनि के द्वारा बताए गए कामदगिरी पर्वत के कुएं में विसर्जित करदेते हैं श्रीराम जी अपनी निशानी के रूप में भरतजी को अपनी खड़ाऊं दे देते हैं।
आज की लीला में प्रतीक दुबे ने श्रीराम यश शुक्ला ने जानकी अक्षय मिश्रा ने लक्ष्मण समर्थ तिवारी ने भरत शिवाय शुक्ला ने शत्रुघ्न अजय परसाई ने वशिष्ठ मनोज परसाई ने निषाद दीपक साहू ने भील अमित यदुवंशी ने कैकयी पार्थ तिवारी ने सुमित्रा सहज दुबे ने कौशल्या और दीपेश व्यास ने अत्रि मुनि की भूमिका निभाई । जानकी जी सहित माताओं का श्रंगार प्रिया पाराशर का रहा।
पात्र निर्देशक पं सुनील चौरे के साथ संगीत निर्देशन पं राम परसाई आदित्य परसाई एवं सारंगी पर अथर्व दुबे और तबले की संगत आनंद नामदेव की रही ।






