नर्मदा नगरी नर्मदापुरम के हृदय स्थल सतरस्ते पर विराजमान हैं जगदंबा दक्षिणेश्वरी माता महाकाली

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::::नवरात्र महोत्सव::::

मंदिर में विराजमान हैं तीन देवियां

बलराम शर्मा नर्मदापुरम। नर्मदा नगरी नर्मदापुरम मंदिरों का शहर है। हर गली मोहल्ले कालोनियों तथा चौक चौराहों पर मंदिर श्रद्धालुओं काे अाकर्षित करते हैं। मां नर्मदा के पावन तट पर बसी धार्मिक नगरी में अनेक मंदिर प्रसिद्ध भी हैं। इन्हीं मंदिरों में सतरस्ता स्थित माता रानी महाकाली का मंदिर भी शामिल हैं। इस मंदिर की विशेषता है कि एक ही मंदिर में तीन मूर्तियां विराजित हैं। पाताल गर्भगृह में योग निद्रा देवी लेटे हुए स्वरूप में हैं, पृथ्वी के धरातल पर माता महाकाली दर्शन दे रही हैं, आकाश में भद्र काली मां की मूर्ति स्थापित है। दूसरी विशेषता है यह मंदिर जनभागीदारी से तैयार हुआ है। जो नर्मदापुरम का प्रमुख आस्था का केंद्र बना हुआ है। प्रदेश में सबसे अलग सात रास्ताओं का केंद्र होने से जिस भी रास्ते से यहां से कोई भी श्रद्धालु निकलता है श्रद्धा भक्ति से सिर झुका कर ही आगे बढ़ते हैं। शहर के मुख्य बाजार के अधिकांश व्यापारी प्रतिदिन यहां पर माथा टेककर ही अपनी दुकान खोलकर ही व्यापार व्यवसाय की शुरूआत करते हैं। दोनों समय यहां पर आरती होती है। माता महाकाली के मंदिर में मंदिर समिति के द्वारा अनेक लोगों के जन्म दिन भी हंसी खुशी व श्रद्धाभाव के साथ मनाए जाते हैं।

मंदिर का संक्षिप्त इतिहास

शहर के हृदय स्थ्ल सतरस्ते पर करीब 50 साल पूर्व 1947 से माताकाली की छोटी सी मढिया थी। शुरूआत शारदीय नवरात्र में देवी प्रतिमा स्थापना कर नवरात्र मनाने से हुई थी। धीरे-धीरे भक्तों ने टीन का पंडाल बनवा दिया था। यहां शारदीय नवरात्रि में लगातार मां काली की मूर्ति स्थापित होती थी। वर्ष 2000 में नवरात्री में जो शेड बनाया वह शेड 2007 तक स्थायी रूप से बना रहा, इस शेड में मूर्ति व तस्वीर की आरती प्रतिदिन वर्ष 2007 तक समिति द्वारा की जाती रही। 2004 में अस्थाई शेड के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया गया। 2007 में तत्कालीन कलेक्टर द्वारा दोनों पक्षों में समझौता कराकर सतरास्ते के सौंदर्यीकरण के दौरान 480 स्क्वायर फीट पर पक्का निर्माण कराकर समिति को सौंपा गया। 2012 में समिति द्वारा माता महाकाली की विशाल मूर्ति की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा करायी गई। 2014 में हाईकोर्ट के आदेश पर शासन प्रशासन ने समिति सदस्यों से समझौते के तहत मंदिर हटाने का निर्णय लिया। जिस दिन मंदिर को हटाया जा रहा था उस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु सतरस्ते पर मौजूद थे। अधिकांश श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू निकल रहे थे। सतरस्ता पर ही उत्तर दिशा में मौजूद हनुमान मंदिर के पास प्रशासन के सहयोग से जगह आवंटित हुई उस जगह पर जन सहयोग से मंदिर तैयार हुआ। उसके बाद से यहां पर हर नवरात्रि में उत्सव मनाया जा रहा है। वहीं महाशिवरात्रि पर्व पर यहां पर शहर के प्रसिद्ध काले महादेव मंदिर से पालकी यात्रा में भगवान भोलेनाथ आते हैं। जिनका जोरदार स्वागत व पूजा अर्चना के साथ वरमाला पहनाई जाती है।

तीन देवियाें का मंदिर

मां के मंदिर में तीन मूर्तियां विराजित हैं। दोनों नवरात्र में शहर के देवी धामों में विशेष पूजा अर्चना होती है। माता महाकाली का विशेष शृंगार होता है। मंदिर में विशेष विद्युत साज सज्जा की जाती है। इस भव्य मंदिर के निर्माण में शहरवासियों का विशेष योगदान है।

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