दुर्गोत्सव के लिए जोर शोर से जुटा बंगाली समाज

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नर्मदापुरम। प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष मां दुर्गा की पूजा के लिए बंगाली समाज उत्साहित है और जोर.जोर से तैयारी कर रहा है जहां तक प्रतिमा की बात है तो एक काठम पर पवित्र गंगामाटी से बंगाल के प्रसिद्ध कलाकार भोपाल में मूर्ति बना रहे हैं बंगाली संस्कृति में माना जाता है कि महालय अमावस्या के दिन प्रतिमा में मां की आंखें उकेरी जाती हैंए यह महत्वपूर्ण अवसर होता है जब मूर्तिकार मां की आंखें उकेरता हैए उस समय पर वहां पर कोई दूसरा व्यक्ति नहीं देख सकता है। पूजन हेतु पंडितजी कोलकाता से यहां आकर पूजन करेंगे। महाशष्टि से विजयदशमी तक आयोजित होने वाली पूजा में पूजन के विशेष अवसर रहते हैं जिसमें प्रथम दिन बोधन व आमंत्रण अधिवास द्वितीय दिवस नव पत्रिका प्रवेश एवं अस्त्र प्रदानए तृतीय दिन महा अष्टमी पूजाए संधि पूजाए महानवमी को कुमारी पूजा के बादए हवन तथा विजयादशमी को सिंदूर खेला के साथ में मां दुर्गा का परिवार वापस अपने लोक की ओर गमन करते हैं। माना जाता है कि मां दुर्गा यहां अपने परिवार अर्थात पुत्र कार्तिक और गणेश तथा पुत्रियां सरस्वती और लक्ष्मी के साथ पधारती हैं यह मानते हैं कि वह अभी मायके आई है और इस वजह से आनंद उत्सव होता हैए मां को नवीन वस्त्र भेंट करते हैं और स्वयं भी पहनते हैं। वर्ष के सबसे बड़े त्यौहार के इस समय सभी लोग खूब आनंद से बिटिया के रूप में मां दुर्गा का स्वागत और आराधना करते हैं पूजा करते हैंए आनंद उत्सव मनाते हैं नर्मदापुरम बंगाली एसोसिएशन से जुड़े हुए समाज के साथीगण अपनी संस्कृति के अनुसार 31वें वर्ष पूजन की तैयारी कर रहे हैं तैयारी बहुत जोरों से चल रही है इस वर्ष पूजा अग्निहोत्री गार्डन फेज 1 में आयोजित होनी है जहां प्रतिदिन भोगए भंडारा व धुनुची आरती भी होगी।

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