शासकीय माध्यमिक शाला कोड़ियाछीतु ब्लॉक सीहोर के शिक्षकों ने अपने कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों को गर्मी के कारण कक्षाओं में अध्ययन के दौरान पसीने और उमस के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। बच्चे असुविधा महसूस कर रहे थे, जिससे उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था।
इस परिस्थिति को देखते हुए विद्यालय के शिक्षक संजय सक्सेना, शैलेन्द्र सिंह ,देवेन्द्र चौहान,देवकरण मालवीय,माधुरी जोशी, फूलवती सेन,मंजू राठौर, शशिबाला नामदेव ने स्वयं आगे बढ़कर अपने निजी व्यय से प्रत्येक शिक्षक ने 1500 – 1500 रुपये एकत्र कर कक्षा पहली से आठवीं तक कक्षाओं में पंखे लगवाने का निर्णय लिया। यह पहल न केवल विद्यार्थियों की तात्कालिक समस्या का समाधान करती है बल्कि यह भी दर्शाती है कि शिक्षक केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के संपूर्ण विकास और सुविधा का भी पूरा ध्यान रखते हैं।
विद्यालय परिवार और ग्रामवासियों की प्रतिक्रिया
विद्यालय में पंखे लगाए जाने के बाद विद्यार्थी अब बेहतर और सुखद वातावरण में पढ़ाई कर पा रहे हैं। बच्चों ने उत्साहपूर्वक बताया कि अब उन्हें गर्मी से राहत मिल रही है और वे पढ़ाई में अधिक ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं। सभी बच्चों में मिलकर अपने गुरुओं को एक साथ धन्यवाद दिया।
ग्रामवासियों एवं अभिभावकों ने शिक्षकों के इस प्रयास का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्य समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता को बढ़ावा देगा। उन्होंने शिक्षकों को “सच्चे गुरु” की संज्ञा देते हुए कहा कि ऐसे शिक्षक ही बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिक्षकों का दृष्टिकोण
विद्यालय के प्रधानाध्यापक संजय सक्सेना ने बताया कि “हमारा उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसा माहौल उपलब्ध कराना भी है जिसमें वे सहज और प्रेरणादायी वातावरण में पढ़ाई कर सकें। जब बच्चे आरामदायक माहौल में अध्ययन करते हैं तो उनकी सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि होती है।”
अन्य शिक्षकों ने भी कहा कि यह पहल बच्चों के हित में एक छोटा सा प्रयास है, जो भविष्य में बड़े बदलावों की नींव रख सकता है।
अनुकरणीय पहल
शिक्षकों द्वारा किया गया यह कार्य केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ संसाधनों की कमी के कारण अक्सर बच्चों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, वहाँ इस प्रकार की पहल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण साबित होती है।
यदि शिक्षक और समाज मिलकर आगे आएँ तो किसी भी प्रकार की समस्या का समाधान संभव है। सिद्धार्थ रघुवंशी ने कहा कि
शासकीय माध्यमिक शाला कोड़ियाछीतु के शिक्षकों का यह सराहनीय योगदान विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक कदम है। यह पहल न केवल विद्यालय बल्कि संपूर्ण समाज के लिए अनुकरणीय है।








