वर्तमान चुनौतीपूर्ण परिदृश्य में श्रीअरविंद जी के विचारों को जनसामान्य तक पहुँचाने की बड़ी आवश्यकता है – कौशलेश प्रताप तिवारी
नर्मदापुरम/ मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद नर्मदापुरम संभाग द्वारा रविवार 14 सितम्बर को संवाद योजनांतर्गत संभाग स्तरीय महर्षि श्री अरविंद जयंती व्याख्यान माला कार्यक्रम का आयोजन जनपद पंचायत, सभागृह नर्मदापुरम में किया गया है। कार्यक्रम क़ी अध्यक्षता डॉ. मोटवानी वरिष्ठ समाजसेवी, मुख्य वक्ता श्री संतोष व्यास, श्री कैलाश, विशिष्ट अतिथि संतोष नोरिया, श्री देवीसिंह मीणा, समाजसेवी श्री योगेश पवार, श्री रामभरोस मीणा एवं परिषद के जिला समन्वयक एवं विकासखंड समन्वयक समस्त उपस्थिति रहें। कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित अतिथियों द्वारा महर्षि श्रीअरविंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम में लगभग 214 लोग उपस्थित रहें।
कार्यक्रम में डॉ. मोटवानी द्वारा महर्षि अरविंद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि अरविंद जी ने राजनीतिक, शैक्षिक और आध्यात्मिक तीनों क्षेत्रों में प्रखरता, विद्वत्ता, समर्पण और रणनीतिक कौशल से अपनी भूमिका का निर्वाह किया। मुख्या वक्ता श्री संतोष व्यास ने कहा कि महापुरूषों मे 1857 के बाद भारत को बल देने का कार्य किया। उसमे महर्षि अरविंद, बाबा साहेब अंबेडकर, डॉ. हेडगेवार जी एवं स्वामि विवेकानंद जी। अखंड भारत की संकल्पना की गई थी जो कि निश्चित साकार होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से महापुरुषों के जीवन चरित्र का अध्ययन कर उनसे प्रेरणा प्राप्त करने की बात कही। श्री अरविंद भारत की दार्शनिक एवं आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक थे। विशिष्ट अतिथि श्री संतोष नोरिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि महर्षि श्रीअरविंद ने संपूर्ण जीवन को ही योग बताया है। समाजसेवी रामभरोस मीणा द्वारा मानव जीवन का विश्लेषण श्री अरविंद से उपयुक्त किसी ने नहीं किया। भारत देश को केवल जड़ पदार्थ ना मानते हुए श्री अरविंद में कहा कि स्पष्ट रूप से इस देश को माँ के रूप में मानता हूँ। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता सग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में आध्यात्मिक जीवन की ओर रुख किया। श्री कैलाश के द्वारा जीवन में यदि कष्ट आते हैं तो वह व्यक्ति को श्रेष्ठकर बनाने के लिए आते हैं।
संभाग समनवयक कौशलेश प्रताप तिवारी ने बताया कि वर्तमान चुनौतीपूर्ण परिदृश्य में श्री अरविंद के विचारों को जनसामान्य तक पहुँचाने की बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए यह आवश्यक है की उनके लेखन, उनकी अभिव्यक्ति को विभिन्न भाषाओं में अत्यंत सरल, व्यावहारिक रूप में देश-विदेश तक पहुँचाया जाए। श्री अरविंद जो लिखते, उसे पढ़ना कठिन है, क्योंकि उनकी अभिव्यक्ति अत्यधिक बौद्धिक है और भाषा बहुत अधिक साहित्यिक और दार्शनिक है। मस्तिष्क को वास्तव में इसे समझने में सक्षम होने के लिए एक तैयारी की आवश्यकता होती है और आम तौर पर ऐसी तैयारी में समय लगता है, जब तक कि किसी को विलक्षण प्रतिभा न मिली हो। एवं जन अभियान परिषद द्वारा किये जा रहे कार्यों के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
जिला समन्वयक पवन सहगल कहा महर्षि जी ने पाश्चात्य संस्कृति न अपनाकर भारतीय संस्कृति को अपनाया। सनातन धर्म के अतिरिक्त श्री अरविंद ने भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया।
कार्यक्रम समापन पश्चात आभार प्रकट जिला समन्वयक पवन सहगल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में नर्मदापुरम संभाग के जिला समन्वयक, विकासखंड समन्वयक, सी.एम.सी.एल.डी.पी. छात्र, नवांकुर संस्था, प्रस्फुटन समिति के सदस्य एव समाज सेवी उपस्थित रहे।






