लगातार 16 दिनों तक धर्मसभा का आयोजन, अंतिम दिवस किया जाएगा भंडारे का आयोजन

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आज कथा व्यास पंडित शिवम मिश्रा देंगे एक दिवसीय प्रवचन
अजामिल की कथा एक ब्राह्मण की है जो जीवन में कुसंगति के कारण पतित होकर डाकू बन गया-पंडित सुनील पाराशर
सीहोर। अजामिल की कथा एक ब्राह्मण की है जो जीवन में कुसंगति के कारण पतित होकर डाकू बन गया, लेकिन मृत्यु के समय अपने पुत्र नारायण के नाम के उच्चारण से यमदूतों से मुक्ति पाकर वैकुंठ लोक चला गया। यह प्रसंग इस बात पर प्रकाश डालता है कि भगवन्नाम के प्रभाव से अंतिम समय में भी पापों से मुक्ति और मोक्ष मिल सकता है। उक्त विचार शहर के सैकड़ाखेड़ी स्थित संकल्प वृद्धाश्रम में पितृपक्ष सोलह श्राद्ध के अवसर पर जारी 16 दिवसीय धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर श्रद्धा भक्ति सेवा समिति की ओर से पंडित सुनील पाराशर ने कहाकि कलियुग में केवल नाम का जाप करने से ही मनुष्य का कल्याण हो सकता है। अजामिल की कथा इस बात का प्रमाण है।
नारायण की भक्ति से सराबोर होकर सारे काम करें तो निश्चय ही मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं
संस्कार मंच के संयोजक मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि नारायण की भक्ति से सराबोर होकर सारे काम करें तो निश्चय ही मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं, अजामिल एक सीधा साधा ब्राह्मण था। बाजार गया जहां एक वेश्या को पत्नी बना लिया। पत्नी के खर्च को पूरा करने के लिए लूटपाट करने लगा और कुख्यात डाकू बन गया। एक बार संतों की टोली उसके गांव पहुंची तो अजामिल की पत्नी ने संतों की सेवा की। सुबह जब अजामिल आया तो संतों ने दक्षिणा मांगी कि अपने होने वाले पुत्र का नाम नारायण रखे। अजामिल राजी हो गया और पुत्र पैदा होने पर उसे नारायण ही पुकारने लगा। जब अजामिल का अंत समय आया, यमदूत उसे लेने आए तो अपने छोटे पुत्र नारायण को पुकारा। अंत समय में नारायण का नाम उच्चारण करने पर श्री हरि के दूत पहुंच गये और यमदूतों से छीनकर अजामिल को भगवान के पास ले गये। इस प्रकार संतों की कुछ पल की संगत से अजामिल को मोक्ष मिल गया। जैसा संग होगा, वैसा रंग चढ़ेगा। जब अजामिल का अंत समय आया तो नारायण का नाम सुनकर यम के दूत भाग गए और हरि के दूतों ने उसे भगवान के पास पहुंचाया। इसलिए संतो की संगति करनी चाहिए।

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