गये भजन, किया सांस्कृतिक नृत्य
सीहोर। सीहोर जिले के ग्राम बिलकिसगंज मे गिरती हुई रिमझिम बरसात में सावन की तीज भुजरिया के दिन महिला महिलाएं रोड पर तीज गुजरिया लेकर सभी महिलाओं द्वारा पुराने संस्कृति के हिसाब से तीज भुजरिया का गीत गाये गये। यह अनोखा पुराना सांस्कृतिक कार्यक्रम पीढ़ी दर पीढ़ी से चला रहा है। ग्राम बिलकिसगंज में सभी समाज के लोग निवास करते हैं। इसमें सभी समाज की महिलाएं मिलकर बीच बजरिया निकलती है। इस मौके पर क्षेत्र के किसान व समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा ने बताया कि यह आयोजन हर वर्ष किया जाता है और सभी ग्रामीणों से आग्रह है कि इसी तरह पुरानी संस्कृति को आज भी कायम रखा जावे। जैसे कि कई गांव में देखने को मिलता है। पुराना डांडिया, पुरानी बिना की कहानी, लेंगी गीत आदि सांस्कृतिक आयोजनों को संजोये रखें। उक्त कार्यक्रम में धापू भाई राजपूत, संगीता बाई नाथ, शोभा बाई चतुर्वेदी के सहयोग से सफल हुआ, जिसमें पंडित जी की अहम भूमिका रही। उक्त आयोजन हर वर्ष तेज भुजरिया परंपरा से चली आ रही है। इस अवसर पर कमलाबाई प्रजापति, सरिता मेवाड़ा, यशोदा बाई, नर्मदा विश्वकर्मा, लक्ष्मी विश्वकर्मा, पिंकी मीणा, राजू बाई परमार, सीताबाई परमार, शिप्रा बाई, सहित दर्जनों महिलाओं द्वारा तीज भुजरिया का आयोजन किया गया।








