चार दिन का प्रशिक्षण पूरा, 57 लोगों को मिले प्रमाण पत्र
सीहोर (मोगराफूल)। गांवों में ब्रिकेटिंग तकनीक से न केवल सफाई बढ़ेगी, बल्कि इससे रोजगार और खुद का काम शुरू करने के मौके भी मिलेंगे। यह बात डॉ. राजकुमार मालवीय, प्रदेश भाजपा झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ कार्यालय प्रभारी ने मोगराफूल गांव में हुए चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर कही। इस प्रशिक्षण का मकसद था। ग्रामीण घरों में कचरे से ब्रिकेट बनाना सिखाना और इसे स्टार्टअप के रूप में बढ़ावा देना।
इस कार्यक्रम का आयोजन माँ हिंगलाज सेवा समिति ने किया। इसे मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद् ने प्रायोजित किया। कर्मयोगी संस्था ने स्थानीय स्तर पर सहयोग किया।
प्रशिक्षण में ग्रामीणों को घरेलू और खेतों के कचरे से ईंधन ब्रिकेट बनाने की विधि सिखाई गई। इसमें ब्रिकेटिंग मशीन चलाने और उसकी देखभाल की भी जानकारी दी गई। विषय विशेषज्ञ डॉ. आकाश पटेल ने बताया कि यह तकनीक कम खर्च में गांवों में आय का अच्छा साधन बन सकती है।
प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी 57 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए। कार्यक्रम सामुदायिक भवन मोगराफूल में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्वयंसेवी और नए उद्यम शुरू करने की सोच रखने वाले लोग शामिल हुए।
डॉ. मालवीय ने कहा, प्रधानमंत्री श्री मोदी के स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाने में यह तरह के प्रशिक्षण बहुत मददगार हैं।
ग्राम पंचायत मोगराफूल के सरपंच श्री जसवंत सिंह ने मां हिंगलाज सेवा समिति और मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् का धन्यवाद देते हुए कहा, इस तरह के प्रशिक्षण से गांवों में तकनीकी जागरूकता बढ़ रही है और लोग आत्मनिर्भर बन रहे हैं। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम जरूरी हैं और पंचायत हमेशा सहयोग के लिए तैयार रहेगी।
यह कार्यक्रम गांवों में नए विचारों और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम साबित हुआ। कार्यक्रम का संचालन संजू जसवंत सिंह ने किया।








