नहीं सुधर रही जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं, आईसीयू में टपक रहा पानी

Join Us

 आष्टा के निजी क्लीनिक पर अधिक ध्यान, आए दिन रहते हैं जिला मुख्यालय से गायब
मरीजों को निजी अस्पतालों से सांठ-गांठ कर बिना बात भोपाल रिफर करने के भी लगे हैं आरोप
ट्रांसफर के बाद भी अस्पताल में जमे सिविल सर्जन को तत्काल हटाया जाए – पंकज शर्मा
सीहोर। जिला कांग्रेस प्रवक्ता पंकज शर्मा ने एक बयान जारी कर सीहोर जिला चिकित्सालय में फैली अव्यवस्थाओं और सिविल सर्जन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन पर जमकर निशाना साधा है। पंकज शर्मा ने कहा है कि जिले के सबसे बड़े अस्पताल सीहोर जिला चिकित्सालय में रोज एक नई कमी सामने आ जाती है, जो जिम्मेदारों की मंशा और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करती है। यहां पहले ही डॉक्टरों द्वारा ड्यूटी से अनुपस्थित रहकर अपने क्लीनिक पर इलाज करने, यहां किराए के डॉक्टर रखने, डॉक्टर और स्टाफ द्वारा मरीजों का ढंग से इलाज ना करने तथा बदसलूकी करने, दवाओं की कमी, सोनोग्राफी सहित कई जांचें ना होने, जांच मशीनें खराब होने, डॉक्टरों सहित अन्य कर्मचारियों की संख्या कम होने, खराब पड़ी लिफ्ट, स्टाफ की कमी से परिजनों द्वारा ही व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर मरीजों को लाना ले जाना, अस्पताल परिसर में चल रही अवैध कैंटीन तथा उसमें नियम विरुद्ध प्रयुक्त हो रहे घरेलू गैस सिलेंडर और अस्पताल परिसर में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम ना होने जैसी समस्याएं थी, जिनसे मरीज और उनके परिजन परेशान थे। पंकज शर्मा ने कहा कि अब यहां गंभीर मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए आईसीयू वार्ड में पानी टपकने का मामला सामने आया है। किसी भी अस्पताल का आईसीयू वार्ड उसका सबसे बेहतरीन और सर्वसुविधा युक्त वार्ड होता है क्योंकि वहां गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है लेकिन सीहोर जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड की छत से टपकता पानी यहां पसरी अव्यवस्थाओं के सारी हकीकत बयां कर रहा है। मजे की बात ये है कि यहां का आईसीयू भूतल पर स्थित है तथा इसके ऊपर दो मंजिलें और भी हैं, फिर भी यहां पानी टपकना समझ से परे है। सूत्रों के अनुसार यहां फैली इन सभी अव्यवस्थाओं का मुख्य कारण अस्पताल के सिविल सर्जन की मनमानी और भ्रष्टाचार है, वो सभी मामलों में पहले अपना कमीशन तय करते हैं और उसके बाद हो रहे किसी भी कार्य का निरीक्षण तक करना जरूरी नहीं समझते हैं, जिससे ठेकेदार मनमाने ढंग से घटिया निर्माण कर सरकारी पैसे की लूट करता है और आम जनता परेशान होती है। अस्पताल में चल रही अवैध कैंटीन को भी उनका ही संरक्षण है और यहां घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग होने से हादसे की भी आशंका बनी हुई है। गौरतलब है कि ये सिविल सर्जन आष्टा से रोज अप-डाउन करते हैं और वहां निजी क्लीनिक में बैठने को प्राथमिकता देते हैं तथा अपनी सरकारी ड्यूटी पर ध्यान देने के बजाय आए दिन जिला मुख्यालय से गायब रहते हैं। उन पर अधीनस्थों को प्रताड़ित करने तथा अपने चहेतों को उपकृत करते हुए अन्य कर्मचारियों के साथ पक्षपात करने के भी आरोप लग चुके हैं, साथ ही उनके चरित्र पर भी सवाल उठाते हुए उनके अनैतिक कार्यों में लिप्त रहने की बात भी एक महिला अस्पताल कर्मचारी द्वारा कही गई थी, फिर भी उनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं होना अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके अलावा उनके ऊपर भोपाल के निजी अस्पतालों से सांठ-गांठ कर मरीजों को अनावश्यक रूप से भोपाल रिफर करवाने की बात भी सामने आई है क्योंकि सबसे ज्यादा इनके कार्यकाल में ही मरीजों को भोपाल रिफर किया गया है। पंकज शर्मा ने कहा कि ताजा मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आईसीयू में गंभीर मरीज आते हैं और यहां पानी भरने से उनके फिसलकर उन्हें व उनके परिजनों गंभीर चोट लगने की भी आशंका बनी रहती है, जिससे वो ठीक होने के बजाय और अधिक गंभीर अवस्था में पहुंच सकते हैं तथा उनकी जान को भी खतरा पहुंच सकता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि सीहोर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन को बड़े लोगों का संरक्षण प्राप्त है और अपने रसूख के दम पर वो यहां जनकर मनमानी और भ्रष्टाचार कर रहे हैं, जिसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है और उनके स्वास्थ्य पर गंभीर संकट खड़ा हो रहा है। हालांकि लगभग एक माह पूर्व यहां नए सिविल सर्जन को भेजे जाने के आदेश स्वास्थ्य विभाग ने जारी कर दिए हैं लेकिन वर्तमान सिविल सर्जन ने अब तक उनको चार्ज नहीं दिया है और वर्तमान सिविल सर्जन का कहना है कि वो दो माह में रिटायर होने वाले हैं तथा वो यहीं से सिविल सर्जन के पद से ही रिटायर होंगे, सरकार या कोई अन्य कुछ भी कर ले, किसी भी कीमत पर उनको यहां से हटा नहीं सकता। पंकज शर्मा ने अंत में कहा कि अब ये देखना दिलचस्प होगा कि स्वास्थ्य विभाग ऐसे भ्रष्ट और लापरवाह सिविल सर्जन पर कब कोई सख्त कार्रवाई करता है, जिससे जनता को राहत मिल सके या उनकी मनमानी यूं ही जारी रहती है, जिसका दंश आम आदमी को भुगतना पड़ता है। यदि इस भ्रष्ट और लापरवाह सिविल सर्जन पर जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस पार्टी उग्र आंदोलन करेगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की होगी।

Previous articleसक्रिय राजनीति से दीक्षित ने दिया इस्तीफा
Next articleग्राम भरलाय में हुआ फिल्ड मिटिंग का आयोजन