आषाढ़ माह की पूर्णिमा पर नर्मदा तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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नर्मदा तट के घाटों पर लगा मेला, खूब हुए धार्मिक अनुष्ठान, शाम को हुई मां की महाआरती

नर्मदापुरम। आषाढ़ माह की पूर्णिमा पर नर्मदा तट के सभी प्रमुख घाटों पर स्नानार्थियों की अच्छी खासी भीड़ रही। सुबह से ही स्नान का क्रम शुरू हो गया था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता पूरे दिन लगा रहा। हर घाट पर लोग उमड़ते रहे। विशेष स्नान पर्व का लाभ लेने के लिए दूर.-दराज, क्षेत्रीय तथा स्थानीय हजारों लोग घाटाें पर पहुंच कर स्नान दान का पुण्य लाभ लेते रहे। है। इस पुण्य अवसर पर नर्मदापुरम सहित अन्य अनेक स्थानों पर मेले लगते रहे। नर्मदा तट पर लाखों रुपयों का कारोबार हुआ। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। पंडित राजेंद्र पांडेय के अनुसार पूर्णिमा के दिन नर्मदा में स्नान दान पुण्य का विशेष महत्व है। नर्मदा तट के मंदिरों में पूजन अर्चन के क्रम दिन भर जारी रहे। घाटों पर बैठे हुए सैंकड़ों दरिद्र नारायणों को दान दक्षिणा देकर पुण्य लाभ लिया जा रहा था। कई श्रद्धालुओं के द्वारा भगवान सत्यनारायण की कथा भी कराई जा रही थी। पंडितों ने घाट के गुरजों पर पोलीथीन लगाकर वर्षा से बचाव के प्रबंध कर रखे थे।

बढ़ा हुआ है नर्मदा का जल स्तर

पिछले दिनों रूक-रूक कर हुई लगातार वर्षा से तथा सहायक नदियों में आई बाढ़ का पानी आने से नर्मदा का जल स्तर बढ़ा हुआ है। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने घाटों पर होमगार्ड की ड्यूटी लगा रखी थी। दिन भर श्रद्धालु स्नान करते रहे।

हुए भंडारे और हवन के आयोजन

पूर्णिमा पर कई ग्रामीण क्षेत्र के किसानों ने अपनी ट्राली में अपने गांव के परिजनों को लेकर आए तथा नर्मदा तट के सर्किट हाउस परमहंस घाट के समीप लोक निर्माण कार्यालय के सामने पीपल, वटवृक्ष व नीम के पेड़ों के नीचे तथा धर्मशालाओं में भोजन बनाकर भंडारे का आयोजन किया। पूरा परिसर भंडारे करने वालों से घिरा हुआ था। भंडारे का क्रम अनेक दिनों से नियमित रूप से जारी है इसलिए सर्किट हाउस के पास मेला जैसा लगा हुआ है। शाम के समय सेठानी घाट पर मां नर्मदा की महाआरती की गई। जिसमें सैंकड़ों श्रद्धालु शामिल रहे। इसी तरह नर्मदा तट के अनेक मंदिरों में हवन के आयोजन भी होते रहे।

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