नर्मदापुरम/राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश भोपाल के अनुसार विगत वर्ष 2024 में जूनोटिक बीमारी स्क्रब टायफस के प्रकरण राज्य के 15 जिलों विदिशा, उमरिया, सीवनी, सतना, रीवा, रतलाम, पन्ना, नीमच, नरसिंहपुर, मंडला, नर्मदापुरम, दतिया, छतरपुर, भोपाल व अशोकनगर में कुल 57 आउटब्रेक दर्ज किये गए हैं। अतः स्क्रब टायफस बीमारी की उपचार व रोकथाम हेतु जागरूकता आवश्यक है स्क्रब टायफस बीमारी ओरिएंटिया टीसत्सुगमुशी नामक रिकेशियल जीवाणु से होती है, यह जीवाणु रोडन्ट-चूहों के ऊपर रहने वाले घुन के संक्रमित लार्वा मे पाया जाता है।
लक्षण (Symptom):-
Mite के संक्रमित Chigger लार्वा के काटने के उपरांत मनुष्य में स्क्रब टायफस बीमारी के प्रमुख लक्षण बुखार, सिरदर्द, जोड़ एवं मांस पेशियों में दर्द, प्रकाश से असहनीयता (फोटोफोबिया), सुखी खांसी एक सप्ताह उपरांत शरीर (पेट, हाँथ व पैरों) पर दाने, कुछ प्रकरणों में निमोनिया, मस्तिक ज्वर एवं हृदय संबंधी बीमारी प्रकट होते हैं। शरीर के जिन स्थानों पर संक्रमित लार्वा काटता है उस स्थानों पर दाना उठता है, जो बाद मे जख्म बनकर सूखने पर काला धब्बे के समान दिखने लगता है। उचित उपचार ना मिलने की स्थिति में 30-70% हो सकती है। इस बीमारी की जांच लेब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान संस्थान भोपाल (एम्स), राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान जबलपुर, मेडिकल कॉलेज रीवा आदि में संभावित मरीजों के सैम्पल की जाँच कराई जाती है। भारत सरकार के गाइड लाइन अनुसार स्क्रब टायफस बीमारी का उपचार किया जाना चाहिए।
रोकथाम एवं नियंत्रण
आउटब्रेक की दशा मे जिला स्तरीय रेपिड रिस्पाँस टीम एवं ब्लॉक स्तरीय काम्बेट टीम को अलर्ट पर रखें, जिससे तत्काल आउटब्रेक की अवस्था मे उपचार व नियंत्रण की कार्यवाही की जा सके।आउटब्रेक प्रभावित क्षेत्र मे नियमित सर्विलेंस हेतु सीएमएचओ डॉ नरसिंह गेहलोत ने जिला स्वास्थ्य एवं महामारी नियंत्रण अधिकारी, जिला सर्विलेंस अधिकारी, जिला एपिडिमियोलॉजिस्ट को पत्र जारी करनिर्देशित किया है।
ए.एन.एम/आशा/ मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा घर-घर जाकर प्रभावित क्षेत्र मे फीवर सर्वे किया जाए तथा स्क्रब टायफस बीमारी के लक्षणों के आधार पर फीवर सर्वे मे प्रश्न पूछे जाए।फीवर सर्वे के दौरान संभावित मरीज मिलने पर मरीज का ब्लड सैम्पल एएनएम,सीएचओ. एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा संग्रहीत किया जावे। ब्लड सैम्पल संग्रहण हेतु स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पास इन्जेक्शन, प्लेन वायल, कॉंटन, आईस बॉक्स आदि की व्यवस्था होनी चाहिए।
जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर एवं उपस्वास्थ्य केंद्र के ए.एन.एम व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को स्क्रब टायफस बीमारी के लक्षण, उपचार, व रोकथाम के संबंध मे जागरूक किया जाए जिससे संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग की जा सके।







