जगत के नाथ भगवान जगन्नाथ महास्नान के बाद हुए अस्वस्थ
अब एक पखवाडे तक गादीगृह में करेंगे विश्राम, वैद्य द्वारा उपचार प्रारंभ
नर्मदापुरम। मां नर्मदा के तट पर स्थित जगदीश मंदिर में प्राचीन परंपरा के तहत जगत के नाथ भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना व पंचामृत से महास्नन कराया गया। हर वर्ष की तरह ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर पुरी में स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं के अनुसार नर्मदांचल के प्रसिद्ध व नर्मदा तट के प्राचीनतम मंदिरों में शामिल जगदीश मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ, उनकी बहन देवी सुभ्रदा और बड़े भ्राता बलराम जी की विशेष पूजन अर्चन के साथ सवा मन पंचामृत से महाभिषेक मंदिर परिसर में पं नीरजेश त्रिपाठी के आचार्यत्व में किया गया। यह पूजन अर्चन जगदीश मंदिर के महाेत्सव में शामिल है। इसी के साथ ही भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की तैयारी भी शुरू हो जाती है। जो कि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की दूज से शुरू होती है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार महास्नान के बाद शाम से भगवान को अस्वस्थ मान लिया जाता है इसके साथ ही उनका दिव्य औषधियों से उपचार की शुरुआत भी हो गई है। वैद्य पं गोपाल प्रसाद खड्डर के द्वारा दिव्य आैषधियों से उपचार प्रारंभ कर दिया गया है।
भगवान को मुख्य सिंहासन पर विराजमान करने की बजाए विधि विधान के साथ शयन कक्ष जिसे गादी घर घर कहा जाता है। जो मंदिर में ही है वहां पर भगवान को विश्राम कराया जा रहा है। गादी घर में भगवान के स्वस्थ्य होने तक किसी को भी दर्शन की अनुमति नहीं दी जाती है। सिर्फ पुजारी के द्वारा भगवान को भोग लगाने वैद्य के द्वारा दी जाने वाली आयुर्वेदिक औषधी दिए जाने के लिए दो बार प्रवेश की अनुमति रहती है।
मंदिर के महंत नारायण दास के अनुसार मंदिर में हर वर्ष की तरह पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर के सिंहासन से भगवान को मंदिर प्रांगण में सुबह दूध, दही, शहद, शकर, और घी मिलाकर पंचामृत बनाकर महाभिषेक किया गया। इसी के साथ पुरी की परंपरा के अनुसार दोपहर को मानवीय धारणा के तहत अधिक स्नान की बजह से भगवान को बीमार मान लिया गया है। उनके स्वस्थ्य होने पर ही आषाढ़ माह की दूज से जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव मनाया जाएगा।
नर्मदांचल के धार्मिक महोत्सव में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का एक अलग ही महत्व है। प्रतिवर्ष की भांति आषाढ़ मास शुल्क पक्ष की द्वितीया से रथयात्रा महोत्सव शुरु होगा। यह महोत्सव एक सप्ताह तक जारी रहता है। रथयात्रा का शहर के विभिन्न स्थानो पर पढ़ाव रहता है। इस उत्सव को लेकर आज से ही देश के विभिन्न प्रांतों से साधु संतो को मंदिर से सूचना दी जाना शुरु हो गई। पारंपारिक रुप से भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा जगदीशपुरा स्थित जगदीश मंदिर से निकलती है। उससे पूर्व रथ को सजाने संवारने का क्रम भी शुरु हो जाएगा। भगवान विशाल रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण को निकलेंगे। गाजे बाजे के साथ संत महंत और रामसखी शामिल होती हैं।






