पंवारखेड़ा लाजिस्टिक हब के उद्देश्य को पूरा करने के लिए सार्थक कदम की आवश्यकता

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—:संभाग मुख्यालय के पास लाजिस्टिक हब की वर्षगांठ पर विशेष :—

88 हेक्टेयर कृषि भूमि में 2 अरब की लागत से बनाया हुआ है हब

नर्मदापुरम,बलराम शर्मा।  नर्मदांचल की उर्वरा भूमि में पंवारखेडा की भूमि का अपना एक अलग की महत्व है। नर्मदापुरम संभाग मुख्यालय और देश के प्रमुख रेलवे जंक्शन के बीच एनएच 69 पर केंद्र शासन की योजना के तहत पंवारखेड़ा में 9 वर्ष पूर्व 30 मई को तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री स्व. अरूण जेटली ने लाजिस्टिक हब का लोकापर्ण किया था। जिस उद्देश्य के लिए यह हब बनाया गया है। उसकी पूर्ति के लिए सार्थक कदम उठाए जाने चाहिए थे। जिससे क्षेत्र के किसान लाभाविंत होते। कोल्ड स्टोरेज सहित अन्य तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जानी थी। लेकिन क्षेत्र का दुर्भाग्य ही कहा जाए कि पंवारखेड़ा जैसी बहुउपयोगी व सबसे अधिक पैदावार देने वाली करीब 88 हेक्टेयर उर्वरा भूमि में ईट सीमेंट की गोदाम बना दी गई। आवश्यकता गोदाम की भी है। लेकिन जिले में पूरे मप्र में सबसे अधिक गोदाम पूर्व से ही बने हुए हैं।

बिछाई गई है रेलवे लाइन

हब के लिए केंद्र सरकार के द्वारा रेलवे लाइन बिछा दी गई लेकिन जिस उपयोग के लिए लाजिस्टिक हब की परिकल्पना की गई थी वह पूरी ना होकर गोदाम बन कर रह गया। जो सिर्फ मूंग, धान, गेहूं रखने के ही काम आ रहा है। जो कि अन्य गोदामों में भी रखे जा सकते हैं।

लाखों रूपये खर्च हुए थे आयोजन में

लाजिस्टिक हब के आयोजन में ही लाखों रूपये खर्च किए गए थे। जहां पर तीखी गर्मी में किसानों का सम्मेलन भी बुलाया गया था किसानों के हित में बड़ी बडी बातें हुई थी, खूब झूठ बोली गई थी। भाषण देने वाले मंच से उतरने के बाद गिरते गिरते बचे थे।

कोल्ड स्टोरेज का दिखाया था सपना

कोल्ड स्टोरेज के साथ इस हब से किसानों की उपज, फल सब्जी व खाद्यान्य को रखकर किसानों को लाभांवित करने का प्लान बनाया गया था। वह सपना ही रह गया। फल-सब्जी और बागवानी फसलों का व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को ट्रांसपोर्टिंग में सहूलियत देने का प्लान बनाया गया था। भोपाल-इंदौर की तर्ज पर हब में 40 हजार क्विंटल तक कोल्ड स्टोरेज किया जा सकेगा ऐसा कहा गया था। यह हब अभी पूरी तरह काम नहीं आ रहा है।

25 एक़ड में आटा, मैदा, दाल, और आलू चिप्स की होना थी इकाइयां

सपने दिखाने के लिए प्लान तो यह भी बनाया गया था कि हब में 25 एक़ड में आटा, मैदा, दाल, और आलू चिप्स की उत्पादन इकाइयां खोली जाएंगी। हब में इन उत्पादों का सुरक्षित भंडारण भी किया जा सकेगा। जो ना जाने कब पूरा होगा। होगा भी या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता है। इस हब से लगभग तीन हजार से अधिक लोगों को रोजगार स्वरोजगार से जोड़ने की बातें कही गई थी। जो पूरी होना बांकी है।

ट्रांसपोर्ट नगर व कृषि अाधारित उद्योग

हब के आसपास ट्रांसपोर्ट नगर व कृषि अाधारित उद्योग लगाने की बड़ी बड़ी बातें भाषणों में कही गई थी जिस पर तालियां बजती रही थी। उस समय तो लोगों को उम्मीद भी जग रही थी क्योंकि बड़े-बडे गोदाम तो बन ही गए थे। लेकिन रैसलपुर के पास जो ट्रांसपोर्ट नगर की बातें हुई थी वह अधूरी ही रह गई हैं।

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‘एक नजर में कंपोजिट लाॅजिस्टिक हब’

इस हब की लागत 210 करोड़ थी। पूरा हब 88 एकड़ में है फैला हुआ है। यहां पर अनाज फल की 35 हजार टन क्षमता है। इतने बड़े-बड़े गोदाम बनाए गए हैं कि पूरी मालगाड़ी खड़ी हो सके। 25 एकड़ में एग्रो और फूड प्रोसेसिंग के लिए स्थान आरक्षित किया गया है। 04 हजार मीट्रिक टन कोल्ड स्टोरेज की सुविधा बनाई गई है।

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बड़ा समारोह हुआ था

30 मई को ही तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री स्व. अरूण जेटली, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अनेक मंत्रियों की मौजूदगी में बड़ा समरोह हुआ था। जिसमें क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान आए हुए थे।

कस्टम की स्वीकृति की बात कही गई थी

क्षेत्र के विशाल क्षेत्र में फैले कंपोजिट लॉजिस्टिक हब को कस्टम की स्वीकृति मिलने की बात कही गई थी। बुदनी के वर्धमान और ट्राइडेंट कंपनी के अलावा मंडीदीप के एचईजी का मटेरियल यहां से सीधे बंदरगाहों तक भेजा जाने का प्लान बनाया गया था।

उपज को निर्यात किया जाना था

हब के माध्यम से क्षेत्र के किसानों की उपज को भी सीधे निर्यात करने का प्लान बनाया गया था। दिखाने के लिए कुछ समय तक लॉजिस्टिक हब में फल, सब्जियों का स्टोरेज शुरू किया गया था। जो धीरे-धीरे बढ़ने की बजाय कम होता गया।

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