दहलन व खाद्यान्य के बाद फलों की पैदावार में भी आगे निकल रहा है नर्मदापुरम जिला
बलराम शर्मा
नर्मदापुरम। मां नर्मदा और तवा की तलहटी वाली उर्वरा भूमि में मूंग, चना, जैसी दलहनी फसलों, सब्जी की पैदावार में अव्वल नंबर पर आने वाले नर्मदापुरम में फलों की पैदावार में भी तेजी आती जा रही है। कुछ वर्ष पहले तक डंगरबाड़ी में तरबूज खरबूज की खेती होती थी। अब डंगरबाड़ी में सब्जी और खेतों में तरबूज की फसल ली जा रही है। तरबूज की एक बार की फसल तो उत्तर प्रदेश के व्यापारी लेकर चले गए। अब दूसरी बार की फसल आना शुरू हो गई है। तरबूज के थोक व्यापारी घूड़नबाबा ने बताया कि इस बार की पहली फसल खेतों से ही अधिकांश उत्तर प्रदेश व अन्य स्थानों की ओर रवाना हो गई थी। मंडी में कम आवक हो रही थी। अब मंडी में फिर से तरबूज की दूसरी फसल आने पर आवक होने लगी है।
जिसकी नीलामी सुबह कृषि उपज मंडी के सब्जी मंडी वाले क्षेत्र में हो रही है। एक दिन में ही करीब 500 क्विंटल तक तरबूज की थोक में बिक्री हो रही है। आने वाले दिनों में और ज्यादा मात्रा में तरबूज आने की संभावना बताई जा रही है। इससे किसानों की स्थिति भी मजबूत हो रही है।
नोतपा में सबसे ज्यादा बिक रहा है तरबूज
नौतपा के दूसरे दिन से ही गर्मी का रूख तेज हो चला है। डाक्टर बताते हैं कि गर्मी के दिनों तरबूज खाना फायदेमंद है इससे पानी की पूर्ति होती है। तरबूज खाने से लू नहीं लगती है। पेट में तरावट रहती है। इस मौसम का सबसे अच्छा फल तरबूज ही है। घूड़न बाबा का कहना है कि कुछ लोग तरबूज में इंजेक्शन लगाने की झूठी अफवाह फैलाकर सोशल मीडिया पर अपनी टीआरपी बड़ाने की कवायद करते हैं। उन्होंने बताया कि तरबूज की अनेक वेरायटी आती है। पकने पर लाल हो ही जाता है।
खेतों में तीसरी फसल तरबूज की खेती
नर्मदा और तवा की रेत की बजाए खेतों में तरबूज की खेती हो रही हैं। इससे तरबूज का उत्पादन तेजी से बढ़ गया है। गर्मी बढ़ने के साथ ही बाजार में इसकी मांग भी खासी बढ़ गई है। पिछले कुछ दिन से मंडी में लगातार तरबूज की खेप आ रही है। पिकप में छोटे व्यापारी या किसान तरबूज की फसल लेकर आ रहे हैं।
अच्छा हो रहा मुनाफा
तरबूज से तीन पक्षों को अच्छा मुनाफा हो रहा है। किसान, व्यापारी तथा छोटे दुकानदार जो फुटकर में बेंचकर मुनाफा कमा रहे हैं। दरअसल मंडी में अनाज सब्जी के बाद तरबूज के वाहनों के खडे होने के लिए पर्याप्त जगह है। जितने तरबूज मुख्यालय की मंडी में आ रहे हैं उतने जिले में अन्य मंडियों में नहीं आ रहे हैं। बेचने और खरीदने वाले सुबह 9 बजे से मंडी में पहुंच जाते हैं।
दो घंटे में लाखों की बिक्री
जैसे ही मंडी में तरबूज की गाड़ी लगती है। दो हिस्सों में पिकप खड़ी होती हैं। दो से ढ़ाई घंटे में लाखों रुपये के तरबूजों की थोक में बिक्री हाे जाती है। उसके बाद जो खरीदते हैं वे अपनी दुकानें बाजार में खुले स्थान पर ढेर लगाकर 20 रुपये किलो में बेच रहे हैं। शहर में करीब 100 से अधिक दुकानें तरबूज की लग रही है। हर घर में तरबूज जा रहा है।
दो दर्जन जिलों में पहुंच रहा तरबूज
जिले से करीब दो दर्जन जिलों में तरबूज की खपत हो रही है। औषतन तीन सौ से चार सौ क्विंटल तरबूज की बिक्री एक दिन में हो रही है। शहर में ही प्रतिदिन साढ़े चार सौ क्विंटल तरबूज की आवक हो रही है। इसके बाद यहां से इंदौर, भोपाल, देवास, रायसेन, सहित कई जिलों में तरबूज की खेप पहुंच रही है।
कम समय की फसल
किसानों एवं उद्यानकी अधिकारी रीता उइके का कहना है कि तरबूज की फसल कम समय में ही तैयार हो जाती है। इससे किसान इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। पहले डंगरबाड़ियों में इसका सीमित उत्पादन होता था। अब खेत में अच्छी खासी फसल हो रही है।
दर्जन भर गांवों में हो रही खेती
जिले में तरबूज की फसल तेजी से आ रही है। जिनमें से सोहागपुर माखननगर के साथ ही नर्मदापुरम ब्लाक के रायपुर डोंगरबाड़ा जासलपुर जासलपुर टील घानाबढ़ बांद्राभान सांगाखेड़ा शुक्करवाड़ा फार्म बालाभेंट, सहित अनेक गांवों में तरबूज की खेती हो रही है। रायपुर के, संतोष गौर, ईश्वरी सैनी, बांद्राभान के विनोद कहार ने बताया कि अब तेजी से किसानों का रूझान तरबूज की तरफ बढ़ रहा है।







