सीहोर (संदीप पंडा)। पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे सीहोर जिले के समस्त लोगों में नगर पालिका के विरूद्ध भारी आक्रोश दिखाई दे रहा है, जहां बोरवेल से लेकर नल, कुआं, बावडी आदि के सूख जाने से सीहोर जिले का हर नागरिक पानी के संकट से जूझ रहा है पानी की भारी किल्लत को लेकर ग्रामीण व शहरवासी नगर पालिका में रोजाना आवेदन लेकर पहुंच रहे है लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिलेवासियों द्वारा पानी के टैंकर व पानी की समस्या को लेकर कई बार गुहार लगाई गई लेकिन न तो नगर पालिका द्वारा टैंकर उपलब्ध कराये जा रहें है और ना ही पानी की समस्या से निपटने के लिये को ठोस कदम उठाया जा रहा है, जिससे उन्हें जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है हालांकि जिले में नेताओं व अधिकारियों की चाटूकारिता करने वाले प्रभावशील व्यक्तियों को टैंकर की सुविधा जरूर उपलब्ध कराई जा रही है लेकिन जिले की गरीब जनता को इससे वंचित रखा जा रहा है जो कि नगर पालिका की करनी व कथनी पर प्रश्र उठाता है। हालांकि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पूरे मध्यप्रदेश में जल गंगा संरक्षण अभियान चला रही है इसके बावजूद नगर पालिका कुंभकरण की नींद सो रही है और जनता बिना पानी रो रही है। हर साल पेयजल योजना पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद पानी की समस्या का समाधान नहीं हो सका है. अहम बात ये कि सीहोर केन्द्रीय कृषि मंत्रीशिवराज सिंह चौहान का गृह जिला है। गांव व शहर के लोगों का कहना है कि सिर्फ बारिश और सर्दी के मौसम में ही पेयजल ठीक तरीके से मिल पाता है. गर्मियों के करीब चार महीने इस इलाके के लोगों के लिए काफी मुश्किल भरे रहते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई राजनेताओं और प्रतिनिधियों ने जिले की पेयजल समस्या के समाधान का वादा तो किया लेकिन इसे अभी तक पूरी नहीं किया गया है. विदित हो कि हर वर्ष भीषण गर्मी के प्रकोप से नदी और पानी के तमाम स्रोत सूख जाते है जिससे शहर वासियों को जल संकट का सामना करना पडता है।







