मृदा परीक्षण : आधुनिक कृषि की नींव
भरपूर फसल उत्पादन के लिए अनिवार्य है मृदा परीक्षण
पाना चाहते हैं निरंतर बेहतर उपज, तो जरूर कराए मिट्टी की जांच
निःशुल्क मिट्टी परीक्षण करा सकते हैं किसान भाई
कृषि विभाग में निःशुल्क मिट्टी परीक्षण निरंतर जारी
जागरूक हो किसान, अपनाए मृदा स्वास्थय कार्ड
खेती में अच्छी उपज के लिए, पोषक तत्वों की जानकारी जरूरी
नर्मदापुरम/ उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास नर्मदापुरम ने बताया कि खेत की मिट्टी और लगाई गई फसल की आवश्यकता अनुसार, सही समय पर, सही मात्रा में, सही विधि से खेत में डाला गया खाद एवं उर्वरक ही ‘संतुलित उर्वरक प्रबंधन है। अपनी कृषि भूमि की सेहत, गुण-दोष, फसल की आवश्यकता और संतुलित उर्वरक प्रबंधन के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होने के चलते, किसान भाई आमतौर पर नाईट्रोजन धारी उर्वरकों का अत्याधिक मात्रा में प्रयोग करते है, जो न सिर्फ कृषि उपज की गुणवत्ता के लिए खतरनाक है बल्कि मिट्टी की उत्पादकता, संरचना, सेहत एवं उर्वरा शक्ति को हानि पहुँचाते हैं साथ ही इससे भूमिगत जल में जहरीली नाईट्रेट की मात्रा भी बढ़ जाती है, जिससे मानव स्वास्थय और पर्यावरणीय समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। फसलीय पौधों के सही विकास के लिए आवश्यक रूप से 17 पोषक तत्वों का संतुलित सटीक पोषक तत्त्व प्रबंधन अपनाकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है। खेत की मिट्टी की जांच कराकर, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रबंधन किया जा सकता है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में “स्वस्थ धरा-खेत हरा” का नारा के साथ मृदा स्वास्थय कार्ड योजना (स्वाईल हेल्थ कार्ड स्कीम) चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य खाद एवं उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग से खेत की मिट्टी में उपस्थित पोषक तत्वों में होने वाली कमी को दूर करना है। इस योजना से किसानों के खेत से मिट्टी प्राप्त कर, प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाता है तथा किसानों को अनुशंसा सहित मृदा स्वास्थय कार्ड निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं। इन कार्ड की सहायता से किसान भाई अपने खेत की मिट्टी के बेहतर स्वास्थय और उर्वरक में सुधार के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का उचित मात्रा में उपयोग करने के साथ ही मिट्टी की पोषक स्थिति की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। मिट्टी की जांच से ही पता चलता है कि खेत की मिट्टी में कौन सा पोषक तत्व अधिक या कम मात्रा में है। अगर आप मिट्टी की जांच कराए बिना उसमें उर्वरक डालते हैं तो संभावना है कि खेत में मिट्टी और फसल की जरूरत से अधिक या कम असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरक डाल दिया गया हो। यदि ऐसा होता है तो आवश्यकता से कम उर्वरक डालने पर कम उपज मिलेगी और आवश्यकता से अधिक उर्वरक डालने पर खेत की भूमि खराब होने की संभावना ज्यादा रहती है साथ ही उर्वरक का गलत उपयोग होगा जिससे पैसा भी बेकार जाएगा। यदि किसान भाईयों को अपने खेत की मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्त्वों की जानकारी रहती है तो उन्हें मिट्टी के गुणों को समझकर, उपयुक्त फसलों का चयन करने में आसानी होती है, अच्छी खेती करते हैं एवं ज्यादा मुनाफा प्राप्त करते हैं। अगर खेती में लंबे समय तक बढ़िया उत्पादन की उम्मीद रखते हैं तो मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के आधार पर खेत की मिट्टी की परिस्थिति, खेत की जरूरत के अनुसार उनमें जिन पोषक तत्वों की कमी है उन पोषक तत्वों को उपलब्ध करवाएं। इस सरल लेकिन शक्तिशाली माध्यम से कम लागत में उत्पादन को बढ़ाकर, बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास नर्मदापुरम ने बताया कि जिला नर्मदापुरम के प्रत्येक विकासखंड में संचालित मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं पर मिट्टी परीक्षण किया जाकर किसान भाईयों को निःशुल्क मृदा स्वास्थय कार्ड प्रदान किए जा रहे हैं। यदि आप खेत की मिट्टी की निःशुल्क जांच करवाना चाहते हैं, तो अपने खेत की मिट्टी का प्रतिनिधि नमूना लेने के बाद, उसे किसी स्थानीय कृषि अधिकारी या नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय में जमा करा सकते हैं।






