नर्मदापुरम। जिनकी मियाद निकल चुकी अर्थात जिन तथाकथित अधिकारियों को तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे बेमियादी अधिकारियों को अब जल्द से जल्द किसी अन्य दूरस्थ जिले में तबादला किए जाने का जिले वासियों को तथा मुख्यालय के नागरिकों को इंतजार हो रहा है। कार्यालयों में जमकर मीटिंग ईटिंग और चीटिंग कर चुके इन मुसाफिरों को अब जल्द यहां से किसी अन्य जिले में भेजा जाना चाहिए ऐसी मांग कुछ वर्षों से हो रही है। लेकिन शासन में बैठे जबावदार लोग ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। इस कारण ये मुसाफिर अपना टाइम पास कर रहे हैं। कईयों ने कई दिनों से सोच भी लिया है कि उनके अब बोरिया बिस्तर समटने अर्थात इस पवित्र नगरी नर्मदापुरम से जाने का समय आ गया है। उन्हें इस बात की स्व समीक्षा करनी चाहिए कि जितना वेतन लिया है क्या उतना कार्य ईमानदारी से किया है? लेकिन जिस प्रकार दिए को उसके नीचे का अंधेरा नहीं दिखता उसी प्रकार से इन मुसाफिरों ने जितना समय मीटिंग में बिताया घर में बिताया उतना जनमानस का कार्य नहीं किया है। अपने वरिष्ठ अधिकारियों की जी हजूरी, उन्हें शकल दिखाने, कागजों के पेट भरने में ही बहुत समय निकाल दिया। वास्तव में जनसेवा के कार्य कितने किए यह उनका कलेजा और ऊपर वाला ही जानता है। कुछ ने तो मनमानी पूर्वक अपनी चलाते हुए छोटे कर्मचारियों पर कार्य थोपते हुए समय गुजारने का कार्य किया है। कार्यालय में भी कम समय देेकर फाइले बंगले पर बुलवाई हैं।






