सड़कों पर बिखर रही शराब के बाद भी बेशरम जबावदारों को नहीं है कोई शर्म

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अब तो थोक में तबादले की जरूरत है, लापरवाह तथाकथित अधिकारियों को दिखाया जाए बाहर का रास्ता

पाकिस्तान की बार्डर पर तैनात किया जाए लापरवाही करने वालों कोे

विधायक की चेतावनी के बाद हल्का असर होने के बाद फिर लालची और भ्रष्टाचारियों की बढ़ने लगी मनमानी

माफिया मौज उड़ा रहे है, नौकर दप्तरों व बंगले में ऐशी चलाकर आराम फरमा रहे हैं

नर्मदापुरम। जिले में व्याप्त अव्यवस्थाएं, माफिया राज, तथाकथित अधिकारियों की मनमानी, कम होने का नाम नहीं ले रही है। विधायक डॉ सीतासरन शर्मा को ज्ञापन दिए हुए कुछ ही दिन हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही ज्ञापन देना उचित समझा था। इसके बाद भी जिले में शराब माफिया, रेत माफिया, प्रशासन की आंख के सामने सरेआम अवैधानिक कार्य कर रहे हैं। शहर की सड़कों पर शराब ढोने वालों की शराब की बोतलें बिखरने पर यह सिद्ध हुआ है कि जिला मुख्यालय पर अवैध शराब के कारोबार को तथाकथित जबावदार अधिकारी जो मोटी तनखा लेकर अपना थोंद बढ़ा रहे हैं। ऐसे बेशरमों को कोई शर्म नहीं आ रही है। आम लोग चौक चौराहों पर यह चर्चा कर रहे हैं कि जिलें लंबे समय से ऐश कर रहे लापरवाह अधिकारियों को यहां से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए। लोग गुस्से में यहां तक कह रहे हैं कि जिन लोगों की बजह से शांत शहर में शराब व अवैध रूप से रेत का परिवहन करने वालों पर कार्रवाई करने में अक्षम सिद्ध होे रहे सरकारी नौकरों को यहां से हटाकर पाकिस्तान की बार्डर पर भेज दिया जाना चाहिए।

प्रशासन में बैठे जबावदार नौकर नाैकरानियां मजे कर रहे हैं। उन्हें जनता की परेशानियों से कोई लेना देना नहीं। शहर की सड़कों पर दिन रात अवैध रेत का परिवहन होेता रहता है। दिन रात शहर में दर्जनों स्थानों पर अवैधानिक रूप से शराब का कारोबार जारी रहता है। मां नर्मदा के घाटों पर लगातार मछलियां मारी जाती हैं। लेकिन प्रशासन नाम का तंत्र अपनी आंखो पर पट्टी बांध कर चुपचाप भ्रष्टाचार में लगे हुए हैं। माफिया मौज उड़ा रहे है। नौकर बंगले में आराम फरमा रहे हैं।

किसान, मजदूर, महिलाएं सभी परेशान

मुख्यालय सहित जिले में किसान, मजदूर, महिलाएं, तथा आम नागरिक परेशान हो रहे हैं। उनकी सुविधाआें पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिलता, बोनी के समय खाद बीज नहीं मिलता, जब वे आफिसों के चक्कर काटते हैं तब भी उनकी समस्याआों के समाधान के लिए नौकर नौकरानियां ध्यान नहीं देते हैं।

मार्ग से निकलना हो रहा दूभर

कई महिनों से शहर की सड़कें खुदी पड़ी हैं। अमृत के नाम पर सड़क निर्माण के नाम पर सड़कें खोद कर कई महिनों तक ऐसे ही पड़ी रहती है। लेकिन पट्टी बांधे हुए को नहीं दिखता है कि मुख्यालय के नागरिकों की सुविधा के लिए उन ठेकेदारों से दो शब्द कह दें। इतनी हिम्मन नहीं रहती है।

थोक में तबदाले आवश्यक हैं

वर्षों से तथा कुछ महिनों सेे जो कार्य करने के लायक नहीं हैं ऐसे नालायकाें को यहां से कहीं दूर बाहर दूसरे जिले में भेजा जाना चाहिए। जिले से थोक में तबादले की जरूरत है। जिससे शांत शहर में अशांत टाइप के नौकर और नौकरानियों काे हटाया जाना आवश्यक हो गया है। क्योंकि उनसे व्यवस्थाएं संभाले नहीं संभल रही है। लंबे समय से ऐश कर रहे हैं।

जनप्रतिनिधि इन्हें हटाने में रूचि लें

जो जनप्रतिनिधि कहलाते हैं उन्हें भी लापरवाहों को हटाने में रूचि लेना चाहिए। वे चाहे सत्तारूढ पार्टी के हों या विपक्ष के हों उन्हें जनता की वोट का ध्यान रखना चाहिए। जनता ने उन्हें वोट सर, सर कहके सिर पर चढ़ाने के लिए नहीं दी है।

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